नवा-नवा

गांव के माटी म बसथे हमर छत्तीसगढ़ी फिलिम, गीत अऊ संगीत ल प्यार करईया: तारा साहू

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दिलीप साहू / जय जोहार. बहुत ही कम समय म छत्तीसगढ़ी लोककला मंच के संग छत्तीगसढ़ी सिनेमा म अपन पहचान बनईया तारा साहू न केवल मधुर आवाज के मलिका हे, बल्कि अभिनय कला म भी वईसने ही निपुण हावे। आरंग

एमपी 3

राजा छत्तीसगढ़िया..

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बिजुरी गिरा के निदिंया उड़ा के, का मोहनी खवा दिए रे..     बाली उमर के झन कर गुमान, दू चार दिन म खिया जहि वो..     ऐ दे धमतरी गंगरेल म बईठे तैं अंगार मोती     दिल

तोर बिना का जीना रे..

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तोर बिन कईसे जीहूं रे…   आई जाबे वो मोर रानी, बीच डोंगरी म मैं अगोर लेहुं..   बावा बिगड़ गे तोर ठसन म..   मच्छरदानी ल तान उतान परे हों खटिया म   मोर सतरंगी, खोजत रहिथों रे तोला

रघुबीर…

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मैं ह आवों टूरा राईगढ़िया, असली छत्तीसगढ़िया..     माटी ल छोड़ झन जाना, जल्दी ते लहुट के आना..     रतिहा सजन मोर सपना म आए..     ऐ गड़ी कोई दर्द जिया के न जाने…     का

प्रेम सुमन..

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म्यूजिक थीम..     जा जा रे सुवना तैं उड़ी चली जाबे..     नर मा नरायण भैया लागे, भौजी म सऊंहत लक्ष्मी बिराजे..     मोर सुत जा दुलरवा बाबू, सुत जा न ग..     आंखि म तोर

मोला का होगे..

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आजा रे आजा रे परदेसी आ..     आई एम छत्तीसगढ़िया, मोर चाल चलन हे बढ़िया     ऐ रंगरसिया जोड़ीदार, मोर हिरदे म मारे कटार..     मोर मन ल जादू करे, मोर तन ल काबू करे..    

लीलागर.. फिल्मी गीत

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गुजगुल हाबे वो, गोरी तोर बारी के पताल..     सुनो ग संगी, सुनो ग साथी, ले के आहों गागर म सागर     तोर मया के पिरित म बईहा बन गे हों में लीला     गोरी के गाल