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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय म मनाए गिस अलसी दिवस

 कृषि वैज्ञानिक मन ह छत्तीसगढ़ ल अलसी प्रदेश बनाए करिस आव्हान

 रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर म आज अलसी दिवस के आयोजन करे गिस। ए कार्यक्रम म शामिल राज्य के विभिन्न जिला मन ले आए किसान ल अलसी प्रक्षेत्र के भ्रमण करवाए  गिस। अउ उंमन ल अलसी के उन्नत उत्पादन तकनीक के जानकारी दे गिस।  ए बखत म  प्रशिक्षण सह संगोष्ठी के आयोजन भी करे गिस।  जेमा कृषि वैज्ञानिक मन ह अलसी फसल के खासियत, पैइदा करे के तकनीक, दवा गुण, उपयोग अउ  एखर ले होवइया फायदा के बारे म जानकारी दे गिस।  कृषि वैज्ञानिक मन ह किसान मन ले आव्हान करिस कि अलसी के उपयोगिता अउ महत्व ल देखत हुए अधिक ले अधिक क्षेत्र म अलसी के खेती करें  अउ छत्तीसगढ़ ल अलसी प्रदेश के रूप म स्थापित करय।  अलसी दिवस के आयोजन अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (अलसी), कृषि विभाग छत्तीसगढ़ शासन अउ निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ह संघरा करिस हे।   कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागृह म आयोजित अलसी दिवस समारोह ल संबोधित करत हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. एसएस राव ह कहिन कि अलसी कम अवधि अउ कम सिंचाई आवश्यकता वाला फसल होए के कारण धान के फसल के बाद एखर खेती आसानी ले करे जा सकत हे। एमा कीट-रोग के हमला घलो कम होथे। अलसी म ओमेगा-3 फैटी ऐसिड होए के कारण ये ह दवाई के काम करथे।  अलसी के रेशे ले कपड़ा बनाए  के विधि घलो इजाद कर ले गेहे। इहीं सब्बों गुन के कारण अलसी के बाजार भाव अच्छा हवय।  एखर सेती किसान मन ल अलसी के फसल लेना चाही।  कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डा. ओपी कश्यप के कहिना हे कि छत्तीसगढ़ म पहिली अलसी काफी बड़का क्षेत्र म लगत रिहिस हे। उत्पादन कम के सेती एखर रकबा धीरे- धीरे घटत गिस। वो ह किहिस कि कृषि वैज्ञानिक मन ह अलसी के नवा किस्म विकसित कर डारे हे। जेमा 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिलथे।  समारोह ल डॉ. एके  सरावगी विभागाध्यक्ष आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन घलो संबोधित करिस। परियोजना प्रभारी डा. केपी वर्मा ह अलसी उत्पादन तकनीक अउ ओखर महत्व के बारे म विस्तार ले जानकारी दीस। अलसी दिवस समारोह म जांजगीर-चांपा, कांकेर, दुर्ग, राजनांदगांव, बेमेतरा अउ  मुंगेली जिला के 250 से ज्यादा किसान मन शामिल होइस। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डा. संजय कुमार द्विवेदी ह  अतिथि मन  के प्रति आभार व्यक्त करिस।  ऐ बखत म र इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अउ  कृषि विभाग के वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रिहिस हे।

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