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सूरजपुर: रुनियाडीह के सरकारी स्कूल के बाड़ी ह देवत हे हस्ट पुष्ट भोजन.. कईसे पढ़व पूरा खबर

संसाधन के रोना रोवईया मन ल दिखा दे हे नवा रद्दा, इलाका म बन गे हे मिसाल

सूरजपुर ले ओपी तिवारी के रिपोर्ट….

जय जोहार. सरकारी स्कुलों म मध्यान्न भोजन के हालत अऊ जगह-जगह आत शिकायत के बात तो आम हो गे हे, लेकिन आप मन ल हमन आज एक अईसे स्कूल के कहानी ल सुनाबो जेन ह अपन लईका अऊ ओखर पालक मन के मेहनत ले दूसर स्कूल मन बर एक रद्दा दिखात हे। आखिर अईसे का होईस अऊ का रद्दा ऐ पढव पूरा खबर…

दरअसल सूरजपुर के रुनियाडीह के सरकारी स्कूल ह मिसाल पेश करत हे, काबर कि ऐ स्कूल म मध्यान्न भोजन रांधे म जतेक सब्जी उपयोग म लाए जाथे ओहा स्कूल के बाड़ी ले निकलथे। स्कूल म रांधे जाए के साग भाजी छात्र अऊ ओखर पालक संग गुरुजी मन के मेहनत ले अब्बड़ लहलहावत हे। ऐ काम म विद्यार्थी मन के परिजन के संगे-संग स्थानीय जनप्रतिनिधि मन के घलो सहयोग हे। इहां उगाए गे सब्जी म कोई भी रासायनिक खातू व दवाई के उपयोग नई करे जाए। काबर कि स्कूल परिसर में ही निकलने वाला वेस्ट आइटम ले खाद बनाए जाथे। इही खाद के उपयोग सब्जी उगाए म करे जाथे।

ऐ पहल ले जिहां विद्यार्थी मन काफी खुश हे उहें मजा अऊ मस्ती भी खेती के बहाना कर ले थे। एखर ले शारीरिक परिश्रम के संगे-संग बिना रासायनिक दवई ले पैदा होवईया साग-भाजी के स्वाद घलो मिल जाथे। ऐ पहल ल स्थानीय रहवासी मन घलो खूबेच सराहत हे। ओखर मन के मन म ऐ बात के खुशी हे कि जिहां दूसर स्कूल मन म मध्यान्न भोजन बर ठीक से हरी सब्जी उपलब्ध नई हो पाए उहें रुनियाडीह स्कूल म रोज कम से कम दो सब्जी लईका मन ल खाए बर मिलत हे। संगे-संग इहां मध्यान्न भोजन के मेनु ल बेहतर ढंग ले फॉलो करे जात हे।

देखे जाए त सूरजपुर के रुनियाडीह स्कूल कई मायने म इलाका म एक मिसाल पेश करत हे। ऐ प्रदेश के पहला बैगलेश स्कूल रहे जिहां छात्र मन ल आत्मनिर्भर बनाए के पहल करे जात हे। अईसे म जरूरत ए बात के हे कि ए पहल ल जिला भर म नहीं बल्कि पूरा प्रदेश म लागू करे जाए, ताकि सरकारी स्कूल के प्रति आम मनखे मन के रूझान बढ़े।

एडमिशन बर गोबर के खाद

ऐ बात सुने म जरूर अचरज लागहि के कोनों लईका इहां एडमिशन ले बर आथे या फिर टीसी लेके दूसर स्कूल म जाथे त फीस के रूप मं ओखर मल ले गोबर खाद ले जाथे। एखर उपयोग बाड़ी म साग-भाजी उगाए बर करे जाते। एखर पीछे स्कूल के प्राचार्य के सोच इही हे कि अईसन रचनात्मक कार्य ले लईका मन के कृषि कार्य म रूचि बने रही अऊ आगे चलते ओमन ह ऐ तकनीक ल सीखके उन्नत खेती कर सकत हे।

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