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काबर ऐ गांव म साहू समाज के लोगन मन निवास करे म डरथे, अंधविश्वास हरे कि ऐ ह अभिसाप ! ..पढ़व हमर खास रिपोर्ट

40 साल पहिली एक परिवार ह राहत रिहिस.. फेर अईसे का होईस कि खेती-बाड़ी छोड़के ओमन ल जाना पड़िस गांव छोड़ के

जय जोहार बर धमतरी ले डोमन साहू के रिपोर्ट

धमतरी. आज जहां मनखे ह चांद अऊ मंगल म जीवन के निशान ल ढूंढ़त हे फेर हमर देश म अईसे कई मामला सामने आ ही जथे जेन ह विज्ञान के ऐ विकास ल मात देवत हे। जय जोहार के टीम ह एक अईसे गांव म पहुंचिस जिहां साहू समाज के लोगन मन निवास करे में घबराथे। काबर घबराथे ऐखर कोई सटीक जवाब तो कोनों नई दे पाए लेकिन स्थानीय रहवईया मन बताथे कि जेन ह ऐ गांव म निवास करे के कोशिश करिन ओखर संग कुछ अईसे घटना होईस कि ओला गांव छोड़के जाना पड़िस।

धमतरी जिला के एक गांव हे अमेठी… जिहां साहू समाज के कोनों मनखे निवास नई करे। जेन ह जिला अऊ छत्तीसगढ़ ल जानथे ओखर मन बर ऐ बात ह कोनों आश्चर्य से काम नोहे काबर कि धमतरी जिला ल साहू बाहूल्य माने जाथे। इहां जेखर मन के आबादी 65 फीसदी के आसपास हे। फेर का वजह हे कि ऐ गांव म एको झन साहू परिवार नई है। अमूमन अईसे कोनों गांव नई होही जिहां साहू समाज के लोगन मन निवास नई करे। धमतरी से लगे ऐ अमेठी गांव म हर वर्ग अऊ समाज के मनखे दिखथे लेकिन नई दिखे त साहू समाज के मनखे।

गांव के चन्द्रभान सूर्यवंशी बताथे कि ओला ए गांव म रहत 50 साल होगे। 40 साल पहिली साहू समाज ले एक परिवार इहां निवास करत रिहिस। अमेठी खार म ओखर मन के 30-40 एकड़ खेत घलो हे। जेन समय परिवार इहां निवास करे बर आईस तेन बेरा नवा बईला ह मर गे। परिवार के मुखिया के घलो तबियत ह अब्बड़ बिगड़ गे। संगे-संग ओखर मौत घलो हो गे। जेखर बात परिवार ह गांव छोड़के चल दिन लेकिन खेत खार अभी भी मौजूद हाबे। अईसने 20-25 साल पहिली एक गुरूजी ह घलो गांव म रहे ल लागिन लेकिन अक्सर ओ ह बीमार रहय। बाद में ओखर ट्रांसफर कोनों दूसर गांव म हो गे तब ले ओ ह ठीक हे। चंद्रभान बताथे कि इही सब पुराना बात ल लेके कोनों साहू परिवार बस्ती म निवास करे के हिम्मत नई करय।

इही कहानी गांव के रहवईया मानिक लाल ध्रुव अऊ विरेन्द्र नेताम घलो बताथे कि पुराना मनखे मन कथे कि ऐ गांव म साहू परिवार के लोगन मन नई फले-फूले। फेर एति साहू तहसील साहू समाज के अध्यक्ष अवनेन्द्र साहू ह कहिथे कि शुरू से हमर समाज के लोगन मन अमेठी गांव म निवास नई करे। सिरिफ ऐ बात ह पुराना कहानी हरे। आज भी लोगन मन उहां बसे। अंधविश्वास ले बढ़के ए अई कुछु नोहे।

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