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सासन ले मदद नइ मिलाइस त का होगे…. देस बर खेलन हमार बर गउरव के बात हे

देश बर ओलंपिक मैडल जीते के चाह रखने वाली मजदूर माता-पिता की दो बेटियों ने कहा

बिलासपुर । लगातार सात बछर ले नेसनल खेले के बाद कोनो जगा ले कोनो प्रोत्साहन अउ आर्थिक मदद घलो नइ मिलीस। येकर बाद घलो देस बर मैडल लाय के चाह बने हे। दूनों बहिन न के कहिना हे के सासन के संग नइ मिलिस त का, देस बर खेलन ही हमार बर गरव के बात हे।
मजदूर माता-पिता के दू बेटी ह तलवारबाजी जइसे खेल ल चुनिस अउ सफल तलवारबाज बनके राष्ट्रीय पदक विजेता बनिस। छत्तीसगढ़ सरकार ह उत्कृष्ट खिलाड़ी पुरस्कार ले नवाजिस। जीविका-सिक्छा बर बेटी मन के संघर्ष अभु घलो बरकरार हे।
येकर बावजूद इमन ह देस बर ओलंपिक मैडल जीतना चाहत हे। बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के चिंगराजपारा निवासी दू बहिनी शीला अउ मुन्नी देवांगन नीचट गरीब परिवार ले ताल्लुक रखत हे। माता-पिता मजदूरी करथे। जब बहिनी मन के रुझान खेल मन के ओर होइस त माता-पिता ह बाधा बनने के बजाय हमेसा आघू बढ़स बर प्रेरित करिन। दूनों बहिनी खेल परिसर पहुंचीस। कराते ले सुरुआत होइस, लेकिन कोच तौसीक खान के मार्गदर्सन म तलवारबाजी (फेंसिंग) के ओर रुख करिन।
स्थानीय, जिला व राज्य स्तर म आघू बढ़त हुए दूनों ह रास्ट्रीय स्परधा म हिस्सा लिस अउ अपन मुकाम बनाइस। दीनों बहिनी के कहिना हे के माता-पिता अउ परिवार ल समाज म प्रतिस्ठा दिलाय के चाह म प्रयास जारी रिहिस अउ खेल ह कब जुनून म तब्दील होगे, पता नइ चलिस। हालांकि हालात कठिन रिहिस हे। बीच-बीच म पिता के काम म सहयोग घलो करिन। उपलब्धी मन मिलत गिस, लेकिन परिवार के जीविका अउ अपन सिक्छा ल जारी रखे बर अब घलो संघरस करना पड़त हे। अब फिटनेस ट्रेनर के रूप म घलो काम करत हे। पढ़ाई घलो जारी हे।
शीला बीसीए करत हे उहे मुन्नी बीए द्वितीय बछर म हे। दूनों बहिनी के पास पदक मन के कमी नइए । उमन लगभग छह नेसनल अउ कतको अन्य मइडल अपन नाम करिन। उंखर ये सफलता म राज्य सासन ह घलो उमन ल कई ठन पुरस्कार मन ले नवाजे हे।
दूनों बहिनी ल राज्य सरकार 2015- 16 म उत्कृष्ट खेलाड़ी के पुरस्कार ले घलो नवाज चुके हे। बहरहाल, संघरस ले जूझत दूनों बहिनी के कठिनाइ मन ह दामन नइ छोड़े हे। शीला ह बताइन के उंखर संग अन्य खेलाड़ी मन ल खेल कोटा म नउकरी मिल गेहे। लेकिन उमन ह पीछु के डेढ़ बथर ले भटकत हे।

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