धार्मिक

मां के नाचे लगुंरवा..

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का मोहनी भराए दाई तोर गांव म   बीरा के पानी लिमऊवा चानी वो   मोर दाई नव दुर्गा, माटी म तोला सिरजाओं   झुम झुम के, नाचत हे लंगुरवा ह झुम झुम के   चलो दीदी जाबो वो, चलो

मां के जगमग दियना

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तोर भुवना वो दाई तोर भुवना…     मैया जी बर गड़ देबे, भईया सोनरवा     जग मग जग मग हो…  

झूपत झूपत आबे दाई (दुकालु यादव)

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झूपत झूपत आबे दाई   मुंड म बिराजे हाबे महामाई न, मोहनी बरन लागे     कोरी कोरी नरियर चघावों दाई तोला वो   रिग बिग, रिग बिग जोति बरत हे, लहरावत हे जंवारा हो मां   लंगूर नाचे ताता

देवता झुपत हे (दुकालू यादव)

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रन बन रन बन हो तुम खेलौ दुलरवा   अंधरी अंधारा दाई ददा ल, तिरथ घूमा दिए रे   गजरा लगाए मैया गजरा लगाए..     मैया के चुनरी हे लाल के, नवरात्री मनाबो ऐसो साल के     कोनों

मां के लाली चुनरिया (अलका चन्द्राकर)

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लाली लाली चुनरी में सोन धरी लुगरा, अंग अंग गहना सजाए   लें हौं वो तोर नाव हों मां   ढोल बाजे रे, नंगाड़ा बाजे न   निर्मल पानी भवानी मां, ताल सगुरिया के हो   मना के लाबो जी,

तैं झुपत आबे दाई.. (दुकालू यादव)

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संझा बिहनिया हो, मैं आतरी उतारों मैंया.. खाटी खाटी गांजा ल पीए मोर औघड़ दानी   छोटे छोटे तोर लईका वो दाई, कईसे करन तोर बिदाई     ऐ देवी, ऐ दाई, ऐ मैया     तैं झुपत आबे वो,