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राजा छत्तीसगढ़िया..

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बिजुरी गिरा के निदिंया उड़ा के, का मोहनी खवा दिए रे..       बाली उमर के झन कर गुमान, दू चार दिन म खिया जहि वो..     ऐ दे धमतरी गंगरेल म बईठे तैं अंगार मोती