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हमर माटी के प्रख्यात नाचा कलाकार दाऊ मंदराजी के बायोपिक म नज़र आहि करण खान

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दीपक बावनकर
जय जोहार. हमर माटी, हमर छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति म नाचा के अपन एक अलगेच महत्व हे। एक बेरा उहो रिहिस जेन बेरा म नाचा देखे बर जम्मों गांव के मनखे मन एकजुर हो जाए। जम्मों गांव के मनखे मंच के सामने त मंच म दाऊ मंदराजी के उत्कृष्ठ शैली म नाचा के प्रदर्शन। जेखर भाव भंगिमा ल देख लोगन मन अपन दांत ले उंगली ल दबा लेत रिहिन। जेखर मंच म आते ही ताली के गूंज ह रात म गांव के सन्नाटा ल चीर देत रिहिस। इही माटी के लाल ल सम्मान दे खातिर दुर्ग जिला के सार्वा बंधु मन ह एक बयोपिक के निर्माण करत हे। जेन म छॉलीवुड स्टार करण खान ह मुख्य भूमिका म नजर आहि।
अभी फिलिम के क्षेत्र म बायोपिक के चलन ह अपन चरम म हे। फेर सचिन हो या एमएस धोनी चाहे संजय दत्त… फेर हमर माटी के शान कहवईया दाऊ मंदराजी काबर नहीं..? दुर्ग जिला के सार्वा बंधु मन ह जी-तोड़ रिसर्च के बाद दाऊ मंदराजी के बायोपिक बनाए के ठाने हे। ए दरी राजनांदगांव जिला के अर्जुनी गांव म मंदराजी के शूटिंग बड़ जोर शोर ले चलत हे। ए फिलिम म करण खान लीड रोल करे हाबे उहें ज्योति पटेल, हेमलाल कौशल, लता ऋषि चंद्राकर, उर्वशी साहू, अमर दादा अऊ मुकेश पिपरिया जईसे कलाकार मन ह अपन अदाकारी बगराए हे। दिवाली के आगू-पाछू ऐ फिलिम ल प्रदर्शन करे के तईयारी करे जात हे।
फिलिम के निर्माता सार्वा ब्रदर्स प्रोडक्शन अऊ मां नर्मदा फिल्म प्रोडक्शन हे। ऐखर डायरेक्शन करत हे विवेक सार्वा ह। विवेक ह बताईन कि ऐ फिलिम म अऊ ए कहानी म काम करके बड़ सुघ्घर लागत हे काबर कि ऐ ह एक कालचक्र के फिलिम हरे।  अभी फिलिम के 30 प्रतिशत हिस्सा के शूटिंग हो चुके हे। ऐ शूट ले टीम के सदस्य मन ह अब्बड़ खुश अऊ अपन काम ले संतुष्ट हे। फिलिम म मेकअप विलास राउत के हाबे अऊ कैमरा नागेश शर्मा ह चलात हे।
नवा पीढ़ी बर प्रेरक हे कला के ए लाल ह
1 अप्रैल 1910 म छत्तीसगढ़ के माटी म जमन लेवईया दाऊ दुलार सिंह मंदराजी खेली गांव के संपंन्न जमींदार परिवार म पईदा ले रिहिन। चार-पांच गांव के मालगुजारी रिहिन। फेर बचपन ले गीत-नृत्य ले लगाव रिहिन। तब ओ दिन म गांव-गांव म खड़े साज के बोल-बाला रिहिस। खड़े साज अऊ मशाल लेके जवईया मसलहा नाचा प्रस्तुति के तब संक्रमण काल रिहिस। इही प्रचलित स्वरुप ह विकसित होके गम्मत-नाचा के प्रभावी रुप बन गे अऊ धीरे-धीरे मंच म अपन जगह ल बना लिस। दाऊजी मन नाचा के मंचीय विकास यात्रा म भरपूर योगदान दिन हे। अपन इही विघा ल विकृति ले बचाए के बीड़ा उठात ओला परिष्कृत करे बर खेली गांव म मंचीय प्रदर्शन शुरू कर दिन। कई सक्षम कलाकार ले सुसज्जित ओखर मन के ऐ टोली ह धीरे-धीरे लोकप्रियता के शिखर म चढ़ गे। छत्तीसगढ़ी नाचा के लोकयात्रा रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ ले टाटानगर तक कई छोटे-बड़े जगह म अपन पताका फैलात चल दिस। रायपुर के रजबंधा मैदान म खेली दल के नाचा प्रस्तुति ल आज भी याद करे जाथे। नाचा के माध्यम ले अभिनय के क्षेत्र म मदन निषाद, लालू, भुलवाराम, फिदाबाई मरकाम, जयंती, नारद, सुकालू अऊ फागूदास जईसे दिग्गज मन ल आगू लाए के श्रेय घलो दाऊजी ल जाथे। नाचा के माध्यम ले छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति ल जीवन्त रखे बर अऊ ओखर समुचित संरक्षण बर जीवन भर दाई मंदराजी ह अपन तन-मन अऊ धन ल समर्पित कर दिस। फेर जीवन का आखिरी पहर ह गुमनामी अऊ गरीबी म बीतिस। फेर अपन व्यक्तिगत लाभ-प्रशंसा के चाहत ल कभू आगू नई आन दिस सिरिफ ओमन ह नाचा ल समृद्ध बनाए बर अपन जीवन ल झोंक दिस। साल 1984 म ओखर मन के निधन होगे। छत्तीसगढ़ शासन ह घलो ओमन ल सम्मान दे खातिर लोक कला/ शिल्प बर दाऊ मंदराजी सम्मान स्थापित करे हाबे।

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