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आधुनिक खेती से बदली तस्वीर

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January 18, 2026 3 Mins Read
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युवा किसान गोविन्द कोर्राम आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना कर रहे सब्जी उत्पादन

खेती में भविष्य तलाश रहे युवाओं के लिए बने प्रेरणा

जहां चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है, आदिवासी बहुल कोण्डागांव विकासखण्ड के ग्राम ठोटीमडानार के रहने वाले युवा किसान गोविन्द कोर्राम ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। गोविन्द अपने पिता 55 वर्षीय किसान श्री शोभी राम कोर्राम के साथ मिलकर खेती करते हैं और आज वे गांव के अन्य किसानों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।

गोविन्द परिवार में दूसरे नंबर के बेटे हैं। उनकी एक बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि एक छोटा भाई वर्तमान में आईटीआई से कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रहा है। बहन की शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी गोविन्द पर भी आ गई, जिसके चलते वे अपनी पढ़ाई बीए सेकंड ईयर तक ही पूरी कर सके। कम उम्र में ही परिवार और खेती की जिम्मेदारी संभालते हुए गोविन्द ने खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया।गोविन्द बताते हैं कि उनके पिता पूर्वजों की परंपरा के अनुसार लंबे समय से पारंपरिक तरीके से खेती करते आ रहे थे। पारंपरिक खेती में मेहनत और लागत अधिक लगती थी, जबकि उत्पादन कम होता था। इससे परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से हो पाता था।

समय के साथ घर की जरूरतें बढ़ती जा रही थीं, लेकिन आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही थी। इसी स्थिति ने गोविन्द को सोचने पर मजबूर किया कि खेती को लाभ का व्यवसाय कैसे बनाया जाए। उन्होंने अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफे के लिए आधुनिक खेती को अपनाने का निर्णय लिया। गोविन्द बताते हैं कि उनके पिता केवल पांचवीं तक शिक्षित हैं, लेकिन खेती-किसानी से जुड़े निर्णयों में पिता और बेटे की सोच हमेशा एक जैसी रही। दोनों ने मिलकर यह तय किया कि यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो खेती से भी अच्छी आमदनी संभव है।

शोभी राम के नाम पर कुल 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। योजना का लाभ लेने से पहले इसी भूमि पर पारंपरिक तरीके से सब्जी की खेती की जाती थी। उत्पादन कम होने और लागत अधिक होने के कारण शुद्ध वार्षिक आय लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये तक ही सीमित थी। इससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

करीब दो वर्ष पूर्व गोविन्द को राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संचालित नवीन तकनीक योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के नाम से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया। उद्यानिकी विभाग से संपर्क होने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया। विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के आधार पर उन्होंने ड्रीप सिंचाई एवं मल्चिंग प्रणाली अपनाकर सब्जी उत्पादन शुरू किया।

ड्रीप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाने से खेती में कई सकारात्मक बदलाव आए। पानी की बचत हुई, उर्वरकों का सही उपयोग संभव हुआ और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

वर्तमान में परिवार अपनी लगभग 3 एकड़ भूमि में ड्रिप सिंचाई पद्धति से मिर्च, बैंगन, करेला एवं अदरक की बड़े पैमाने पर खेती कर रहा है। विशेष रूप से पूर्व में जहाँ मिर्च की खेती में प्रति एकड़ लगभग 100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो रहा था वहीं योजना का लाभ लेने के बाद अब कुल 210 क्विंटल मिर्च का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 3 लाख 65 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

आय में हुई इस बढ़ोतरी से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार ने एक ट्रैक्टर खरीदा है, जिससे खेती के कार्य आसान हो गए हैं। आवागमन के लिए घर में तीन मोटरसाइकिलें हैं और परिवार ने पक्का मकान भी बना लिया है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रहन-सहन के स्तर में भी सुधार देखने को मिला है।

गोविन्द की इस सफलता को देखकर आसपास के किसान भी उनसे सलाह लेने आने लगे हैं। कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई पहचान मिल रही है। युवा किसान गोविन्द का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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