पाना म परान: सुई अउ कटर ले पाना म मूरत उकेरत हवय धमतरी के विकास
गणेश्वर पटेल, पोटियाडीह, जिला धमतरी
धमतरी। कला कोनो सीमा के मोहताज नई होवय, अउ जब लगन मन म होवय त ओखर माध्यम घलो नवा मिल जाथे। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला म एक अइसने हुनरमंद कलाकार हवय, जऊन ह कोनो कागज या कैनवास म नई, बल्कि रुख-राई के झरत हुए पाना मन म परान फूंकत हवय। हम बात करत हन ग्राम मोदे (नगरी-सिहावा) के विकास शांडिल्य के, जेकर “लीफ आर्ट” (Leaf Art) आज छत्तीसगढ़ सहित पूरा देश म चर्चा के विषय बन गे हवय।
सुई के नोक ले शुरू होइस ‘नक्काशी’ के सफर
विकास के ये सफर कोनो औपचारिक ट्रेनिंग ले शुरू नई होइस। करीब दू बछर पहिली, जब पूरा दुनिया नवा-नवा कला के खोज करत रहिस, तब विकास ह यूट्यूब के माध्यम ले लीफ आर्ट के बारीकी मन ल समझना शुरू करिस। ओ समय छत्तीसगढ़ म ये कला लगभग अनकही अउ अनजानी रहिस।
विकास बताथें कि ओखर पहिली कलाकृति सुई के नोक ले ‘डॉटिंग’ तकनीक के माध्यम ले बनाए गे “इंडियन आर्मी” के लोगो (Logo) रहिस। सुई के एक-एक छेद ले शुरू होय ये मेहनत आज अइसन मुकाम म पहुंच गे हवय कि ओमन अब तक 300 ले जादा जीवंत चित्र पाना म उकेर चुके हें।
नाजुक पाना अउ फौलादी धीरज
लीफ आर्ट कोनो आम पेंटिंग नोहे। पीपल, बरगद, नारियल अउ बादाम के पाना मन म नक्काशी करे बर “सर्जिकल ब्लेड” अउ सुई के परयोग करे जाथे। विकास कहिथें, “पाना के नस-नस ल बचाके ओखर बीच ले डिजाइन काटना सबले कठिन काम आय। अगर एक मिलीमीटर घलो कटर जादा चल गे, त 5-5 घंटा के मेहनत एक पल म बेकार हो जाथे।” ये कला कलाकार के धैर्य अउ एकाग्रता के असली परीक्षा आय।
पाना म सिमटे हें दुनिया भर के दिग्गज
विकास के जादुई हाथ मन ह पाना म दुनिया भर के महान हस्ती मन ल जीवंत कर दे हें:
क्रांतिकारी अउ महापुरुष: महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, शहीद भगत सिंह, अउ नेल्सन मंडेला।
खेल के सितारे: महेंद्र सिंह धोनी ले लेके फुटबॉल के दिग्गज मेसी, रोनाल्डो अउ एम्बाप्पे तक।
बॉलीवुड के नायक: अमिताभ बच्चन, रजनीकांत अउ किशोर कुमार के मुस्कुराते चेहरा।
ओखर सबले विशेष कृति म 14 फीट लंबा नारियल पाना म बनाए गे “सरला घाघरा” अउ पीपल पाना म “छत्तीसगढ़ महतारी” के नक्शा शामिल हवय, जऊन ह ओकर कल्पनाशीलता ल दर्शाथे।

उच्च शिक्षा अउ नवा पीढ़ी बर संदेश
विकास सिर्फ एक कलाकार नोहे, बल्कि ओमन शैक्षणिक रूप ले घलो बहुत मजबूत हें। एम.ए. (राजनीति विज्ञान अउ समाजशास्त्र) के संग आईटीआई अउ कंप्यूटर डीसीए कर चुके विकास ये साबित करथें कि पढ़ई अउ कला एक-दूसरे के पूरक हो सकथें।
आज ओकर कला के फोटो राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अभियान के माध्यम ले दू बेर दिल्ली भेजे जा चुके हवय। मुख्यमंत्री अउ राज्यपाल घलो ओकर कला के सराहना कर चुके हें। विकास के कहना हवय कि नवा पीढ़ी ल अपन रुचि ल पहिचानना चाहिए। अगर लगन होवय त ककरो घलो मार्गदर्शन (यूट्यूब जइसन माध्यम) ले अपन घर ले ही विश्वस्तरीय कला रचे जा सकथे।

निष्कर्ष
धमतरी के ये माटी के लाल ह बता दे हवय कि कला बर महँगा संसाधन ले जादा “दृष्टिकोण” के जरूरत होथे। झरत हुए पाना मन ल सहेज के ओला ‘अमर’ बना देना ही विकास शांडिल्य के असली पहिचान आय। छत्तीसगढ़ के ये उभरत कलाकार आने वाला समय म अउ कतको कीर्तिमान स्थापित करी, येकर पूरा भरोसा हवय।