अंधियारी ले अंजोर कोती: विनोद के नवा जिनगी के कहानी
बारूद के गंध के जगह अब अपन भविष्य अउ विकास गढ़े बर धर ले हें
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सली पुनर्वास नीति सिरिफ हथियार डलवाए के अभियान नई आय, बल्कि भटके युवा मन के जिनगी म नवा अंजोर लाय के माध्यम घलो आय । जिहाँ कभू बारूद के गंध रिहिस, उहाँ अब विकास के सड़क पहुँचत हे। डर अउ आतंक ल छोड़ के हुनर अपनावत ये युवा मन आज छत्तीसगढ़ के बदलत स्वरूप के चिनहा बन गे हें।
राज्य सरकार के नीति के मुख्य केंद्र सिरिफ आत्मसमर्पण तक सीमित नई हे, बल्कि युवा मन ल आत्मनिर्भर बना के समाज के मुख्यधारा म मजबूती ले स्थापित करना हे। ए कड़ी म दंतेवाड़ा जिला प्रशासन कोति ले ‘लिवलीहुड कॉलेज’ म आत्मसमर्पित युवा मन बर स्वरोजगार आधारित विशेष ट्रेनिंग सत्र चलाए जात हे।
बिनास ले विकास तक के सफर
ए बदलाव के एक जीता-जागता मिसाल हें 27 साल के विनोद कुरसम। बीजापुर जिला के सुदूर बीहड़ गाँव कोकेरा के रहइया विनोद के बचपन ह अभाव अउ डर के साया म बीतिस। पढ़ाई-लिखाई के कमी के सेती विनोद सिरिफ पाँचवीं तक पढ़ सकिस, काबर कि ओखर गाँव के स्कूल ल नक्सली मन बारूद ले उड़ा दे रिहिन। सड़क, बिजली अउ शिक्षा जइसन बुनियादी सुविधा मन ले कटे कोकेरा गाँव म 15-16 साल पहिली नक्सली मन ह पैर पसारिन। विनोद ल कम उमर म ही बाल संगठन म झोंक दे गीस अउ बाद म वोला चौरपल्ली आरपीसी जनताना सरकार के कमांडर बना दे गीस।
बदलाव के संकल्प
विनोद ह स्वीकार करथे कि गलत काम म ओखर जिनगी के कीमती 16 साल व्यर्थ चले गे। फेर सरकार के विकास योजना अउ पुनर्वास नीति ह ओखर सोच ल बदल दिस। 15 जनवरी 2026 को विनोद ह अपन 30 साथी मन के संग आत्मसमर्पण करिस अउ नवा शुरुआत के फैसला लिस। विनोद कुरसम ह कहिथे— “मैं अपन लइका मन ल वो जिनगी नई देना चाहत हंव, जेला मैं ह जियेंव। मैं ओमन ल एक जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहत हंव।”
आत्मनिर्भरता के नवा उड़ान
आज विनोद दंतेवाड़ा के ‘लिवलीहुड कॉलेज’ म इलेक्ट्रीशियन के काम सीखत हे। ओखर चेहरा के मुस्कान ह ओखर पक्का इरादा ल बताथे। ओखर परिवार म दाई-ददा, घरवाली अउ तीन बेटा (बबलू, श्रीकांत अउ निलेष) हें। ओखर बड़े बेटा अभी बालक आश्रम बरदेली म 7वीं कक्षा म पढ़त हे। ट्रेनिंग पूरा होय के बाद विनोद ह अपन गाँव के तीर म ही बिजली के सामान बनाय (रिपेयरिंग) के दुकान खोलना चाहत हे।
विनोद के ये कहानी सरकार के नीति मन के एक बड़ सफलता आय, जेहा बताथे कि “जब जागो, तब सवेरा।”