छत्तीसगढ़ मा ‘ज्ञानभारतम’ पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान ला मिलिस रफ्तार, हजारों विरासत दस्तावेज मन ला सहेजे जावत हे
26 जिला मा समिति बन गे, 4 हजार ले जादा पांडुलिपि मन के सर्वे पूरा; डिजिटल संरक्षण ले सुरक्षित होही संसकृतिक धरोहर
रायपुर. केंद्र सरकार कोति ले सुरु करे गे “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” छत्तीसगढ़ मा तेजी ले आगू बढ़त हवय। ए बड़े कोसिस के मकसद राज मा जतका घलो जुन्ना अउ ऐतिहासिक पांडुलिपि (हाथ ले लिखे पोथी) हवय, ओखर खोज-खबर लेके ओला सुरक्षित रखना अउ डिजिटल माध्यम ले आने वाला पीढ़ी तक पहुँचाना आय।
मार्च 2026 ले सुरु ए देस-व्यापी अभियान मा छत्तीसगढ़ ह बढ़-चढ़ के हिस्सा लेवत हवय। परदेस के 33 जिला मा ले अब तक 26 जिला मा जिला स्तरीय समिति मन के गठन कर दिय गे हवय अउ नोडल अधिकारी मन के नियुक्ति घलो हो गे हवय, बाकी के 7 जिला मा ए काम अभी जारी हवय।
अभियान के तहत जिला स्तर मा बैठक करके पांडुलिपि जमा करइया मनखे अउ संस्था मन के पहिचान करे जावत हवय। संग मा, गाँव अउ छेत्र के हिसाब ले सर्वे करइया मनखे मन ला तैनात करके भुइँया स्तर मा काम ला मजबूत करे जावत हवय।
संसकृति बिभाग, जऊन ह ए अभियान के नोडल बिभाग आय, ‘ज्ञानभारतम’ के क्षेत्रीय संयोजक मन के मदद ले जिला स्तर मा मास्टर ट्रेनर मन ला बिसेस ट्रेनिंग देवत हवय, ताकि सर्वे के काम ह बढ़िया अउ सही तरीका ले पूरा हो सकय।
ज्ञानभारतम अभियान मा भारत सरकार कोति ले पहिली छत्तीसगढ़ मा 148 पांडुलिपि मन के जानकारी दिय गे रहिस। ओकर बाद अब सर्वे के काम मा बड़े उपलबधि मिले हवय। अभी के बखत मा राज के 6 जिला मा सर्वे सुरु हो गे हवय अउ अब तक 4,191 पांडुलिपि मन के सर्वे ‘ज्ञानभारतम एप’ के जरिया ले सफलतापूर्वक करे जा चुके हवय।
ए अभियान ह न केवल परदेस के संपन्न संसकृतिक पहिचान ला सहेजाय मा एक बड़े कदम आय, बल्कि आने वाला पीढ़ी बर ज्ञान के ए अनमोल खजाना ला डिजिटल रूप मा सुरक्षित रखे के एक मजबूत रस्ता घलो बनत हवय।