रायपुर के कृषि विश्वविद्यालय ला मिलिस ‘सबले बढ़िया सोयाबीन अनुसंधान केंद्र’ के राष्ट्रीय पुरस्कार
- हैदराबाद में होय सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के वार्षिक बइठक में मिलिस सम्मान
- कृषि मंत्री रामविचार नेताम ह दीन बधाई अऊ सुभकामना
रयपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रयपुर में चलइया ‘अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन)’ ला राष्ट्रीय स्तर में बछर 2023-2025 के जांच-परख के बखत बढ़िया काम करे बर “सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार” ले सम्मानित करे गे हे। राष्ट्रीय स्तर के ए सम्मान बर कृषि विकास अऊ किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ह बधाई अऊ सुभकामना दीन हें।
ए सम्मान ला राष्ट्रीय अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना नेटवर्क कोति ले प्रदान करे गय हे। ए पुरस्कार रायपुर केंद्र ला ओकर बहुआयामी काम मन बर मिलिस हे, जेमा अनुसंधान परीक्षण, वैज्ञानिक प्रकाशन, नवा किसम के बीज तइयार करना, तकनीक के विकास, किसान मन ले जुड़ाव अऊ बीज उत्पादन सामिल हे।
ए पुरस्कार ला विश्वविद्यालय के टीम के सदस्य डॉ. सुनील कुमार नाग (प्रधान वैज्ञानिक), डॉ. रामा मोहन सावु (वरिष्ठ वैज्ञानिक) अऊ डॉ. ऐश्वर्या टंडन (सह-प्राध्यापक) मन ह प्राप्त करिन।
ए सम्मान ला डॉ. प्रताप सिंह, माननीय कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि अऊ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर; डॉ. एस.के. राव, पूर्व कुलपति, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर; डॉ. के.एच. सिंह, निदेशक, आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर अऊ डॉ. आर.के. माथुर, निदेशक, आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद कोति ले 09 अप्रैल 2026 के हैदराबाद में स्थित प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय, राजेंद्र नगर में आयोजित ‘अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन)’ के 56वीं बछरवारी समूह बइठक में प्रदान करे गय। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ह पुरस्कार पाय अनुसंधान दल के टीम लीडर अऊ सबो सदस्य मन ला ए बड़े उपलब्धि बर बधाई अऊ सुभकामना दीन हें।
ए पुरस्कार ह बड़े जांच-परख अऊ कड़ा मुकाबला के बाद दे गे हे, जेमा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,रायपुर केंद्र ह गजब के सफलता देखाय हे। केंद्र ह लगातार तीन बछर तक पादप प्रजनन, सस्य विज्ञान, पादप रोग विज्ञान अऊ सूक्ष्मजीव विज्ञान जइसन अलग-अलग बिसय मन में सउंपे गय सबो काम ला बढ़िया ढंग ले पूरा करिस अऊ ओकर स्वीकृति घलो पाइस। सोयाबीन अनुसंधान ले जुड़े बढ़िया किस्म के शोध पत्र, सम्मेलन पत्र, बुलेटिन अऊ एम.एससी. व पीएच.डी. के छात्र मन ला सही रद्दा देखाके महत्वपूर्ण योगदान दीन गे हे।
केंद्र ह सुदृढ़ जर्मप्लाज्म प्रबंधन (हर बछर 1000 ले जादा अभिग्रहण), बड़े पैमाना में संकरण कार्यक्रम अऊ ‘आरएससी 11-42’, ‘आरएससी 11-72’ अऊ ‘आरएससी 12-32’ जइसन बढ़िया किस्म के बीज तइयार करे में तरक्की करिस हे। मुख्य उपलब्धि मन में पूर्वी क्षेत्र बर सोयाबीन के तीन नवा किस्म, उत्पादन अऊ सुरक्षा के छह तकनीक अऊ तीन जर्मप्लाज्म लाइन के पंजीकरण सामिल हे। केंद्र ह हर बछर 100 फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (नवा तकनीक के प्रदर्शन), कांकेर जिला में जनजातीय उप-योजना के तहत किसान मन ला फायदा पहुँचाए अऊ लगातार किसान प्रशिक्षण अऊ खेत प्रदर्शन के माध्यम ले बढ़िया काम करिस हे। प्रजनक बीज उत्पादन में लगभग 90% लक्ष्य ला पूरा करे के संग-संग न्यूक्लियस बीज उत्पादन में घलो बड़े उपलब्धि हासिल करे गे हे।
केंद्र ह बड़े जर्मप्लाज्म संग्रह (1100 लाइन तक) के जांच-परख, जादा उपज अऊ बीमारी ले लड़े वाले किस्म (जइसन आएससी 11-42 अऊ आएससी 11-35) के विकास, खाद अऊ खरपतवार प्रबंधन के संग टिकाऊ खेती के नवा तरीका अऊ मौसम के अनुकूल तकनीक बनाए में बड़े भूमिका निभाय हे। अपन मजबूत विस्तार तंत्र के माध्यम ले सोयाबीन केंद्र ह जादा पैदावार वाले किस्म अऊ खेती के बढ़िया तरीका मन ला बढ़ावा दे के, आदिवासी किसान मन ला सहारा दे के अऊ आधुनिक खेती बर जागरूकता बढ़ाके सोयाबीन के पैदावार अऊ किसान मन के आय ला बढ़ाए के काम करे हे।
ए पुरस्कार ह विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मन के एक-जुट मेहनत, ओमन के लगन अऊ किसान मन बर सोयाबीन खेती ला मजबूत बनाए के संकल्प ला देखाथे। ए टीम ह आगू घलो नवा काम करत राष्ट्रीय कृषि विकास में अपन योगदान देवत रही। रायपुर के आईजीकेवी (IGKV) में ए परियोजना ह बछर 2001 ले चलत हे अऊ एहा पूरा देश में सोयाबीन के पैदावार बढ़ाए बर एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम आय।
ए गौरव ला अऊ बढ़ावत, डॉ. सुनील कुमार नाग ला सोयाबीन अनुसंधान अऊ विकास के क्षेत्र में ओकर बढ़िया काम बर सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास समिति, इंदौर कोति ले ‘फेलो-2025’ ले सम्मानित करे गे हे। एकर संग, डॉ. तापस चौधरी ला घलो एक नवा तकनीक बनाए बर सम्मानित करे गे हे, जेमा बीज ला खास जीवाणु (माइक्रोबियल कंसोर्टिया) ले उपचारित करे के सलाह दिए गे हे, जेकर ले सोयाबीन के पैदावार बढ़थे अऊ खाद के सही उपयोग होथे।