मनरेगा के ‘डबरी’ अउ ‘बिहान’ के सहयोग ले सविता बनीस आत्मनिर्भर
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार के लोक-कल्याणकारी योजना के बढ़िया काम ले सहर अउ गाँव के महिला मन ला आघू बढ़े के नवा रद्दा मिलत हे। मनरेगा अउ ‘बिहान’ योजना के मेल-जोल ले महिला मन ह खुद के काम-धंधा सुरु करके अपन गोड़ मा ठाढ़ होवत हें। अइसने एक कहानी सरगुजा जिला के ‘रिमा’ स्व-सहायता समूह के सदस्य सविता के हे, जउन ह अपन मेहनत अउ सरकारी योजना मन के सही उपयोग करके आर्थिक तरक्की के एक प्रेरक मिसाल पेश करे हे।
डबरी ले खुलीस कमाई के नवा रद्दा
सविता ह बताइस कि दू बछर पहिली ओ ह मनरेगा के तहत अपन खेत मा एक ठन डबरी बनवाई रहिस। आज ये डबरी ओकर बर कमाई के बड़े साधन बन गे हे। एक कोती वो ह एमा बड़े पैमाना मा मछली पालन करत हे, त दूसर कोती एही पानी ले अपन खेत के सिंचई घलो करत हे।
समूह ले मिलीस साथ, बढ़िस आमदनी
स्व-सहायता समूह ले जुड़े के बाद सविता ला आर्थिक सहारा मिलीस। ओ ह समूह ले 50 हजार रुपिया करजा (ऋण) लिस अउ डबरी मा मछली के बीज डारिस। बढ़िया देख-रेख के फल ये मिलीस कि ओ ह लगभग डेढ़ लाख रुपिया के मछली बेच के बढ़िया मुनाफा कमाइस। अभी घलो ओकर डबरी मा भर मछली हें, जेकर ले आघू मा अउ जादा कमाई होय के भरोसा हे।
सिंचई ले खेती अउ पोषण दूनों मा फायदा
डबरी के पानी ले सविता ह अपन खेत मा साग-भाजी अउ दूसर फसल ला उगावत हे। एकर ले ओकर परिवार ला बढ़िया पौष्टिक खाना मिलत हे अउ बाजार मा सब्जी बेच के ओला अलग ले पैसा घलो मिलत हे।
सविता ह अपन सफलता के जस (श्रेय) सरकार के योजना ला देवत कहिस कि ये कोशिश मन ह गाँव के महिला मन ला आत्मनिर्भर बने के मौका दीन हे। आज वो ह घर-परिवार अउ समाज के जिम्मेदारी ला सम्हाले के संग एक सफल उद्यमी के रूप मा घलो जान जावत हे।
परदेस मा मनरेगा अउ ‘बिहान’ जइसन योजना मन ले महिला मन ला आर्थिक मजबूती के संग मान-सम्मान ले जियै के मौका मिलत हे, जेकर ले गाँव के अर्थव्यवस्था घलो मजबूत होवत हे।