Jayjohar
Whatsapp Facebook Twitter Youtube
Jayjohar

Type and hit Enter to search

  • होम
  • खबर छत्तीसगढ़
  • नवा छत्तीसगढ़
  • राजनीति
  • छॉलीवुड समाचार
  • हमर रचनाकार
  • एक्सक्लूजिव
  • Youtube Video
    • जोहार पहुना
    • जोहार सितारा
    • जोहार सिनेमा
    • गाना जोहार
    • फिलिम जोहार
    • काव्य जोहार
    • जोहार बिसेस
    • जोहार संस्कृति
  • LIVE
WhatsApp Image 2026 06 24 at 3.56.33 PM
खबर छत्तीसगढ़

विशेष लेख : कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं

Editor Editor
June 26, 2026 3 Mins Read
41 Views
0 Comments

पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक

(एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
(ओमप्रकाश डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

रायपुर, छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं।

कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। ये फसलें प्रायः हर एक प्रकार की भूमि में पैदा की जा सकती है। जिस भूमि में अन्य कोई धान्य फसल उगाना सम्भव नहीं होता वहाँ भी ये फसलें सफलता पूर्वक उगाई जा सकती है। हल्की भूमि में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो इनकी खेती के लिए उपयुक्त होती है।

आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों की खेती अपनाने व उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।

बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं।

पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं।

Tags:

ChhattisgarhKodo-Kutkimodern identityraipur newsstate newstraditional heritage

Share Article

Other Articles

Culture 1
Previous

 ऐतिहासिक पुरानी कचहरी बनी शिक्षा और संस्कृति का नया केंद्र

1782461341 7deeb8a7a0e080d799b7 1
Next

नई सोच, नई तकनीक, नई उम्मीद : नैनो उर्वरकों से सशक्त हो रही खेती

Next
1782461341 7deeb8a7a0e080d799b7 1
June 26, 2026

नई सोच, नई तकनीक, नई उम्मीद : नैनो उर्वरकों से सशक्त हो रही खेती

Previous
June 26, 2026

 ऐतिहासिक पुरानी कचहरी बनी शिक्षा और संस्कृति का नया केंद्र

Culture 1

Related Posts

WhatsApp Image 2026 09 18 at 11.07.22 PM

इवेंट मैनेजर्स के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को मिले राष्ट्रीय मंच, पर्यटन में भी बड़े अवसर

Editor Editor
September 18, 2026
WhatsApp Image 2026 09 18 at 11.06.53 PM

नवा रायपुर में गोल्फ को मिला ग्लोबल मंच, डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन में खलिन एच. जोशी बने विजेता

Editor Editor
September 18, 2026
photo collage.png 3 2

होटल-रिसॉर्ट से लेकर PPP मॉडल तक, छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश का नया रोडमैप

Editor Editor
September 18, 2026
WhatsApp Image 2026 09 18 at 8.00.48 PM

बढ़ते शहरों के लिए बदलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल, भविष्य की जरूरतों पर काम कर रही सरकार: अरुण साव

Editor Editor
September 18, 2026

Follow Us

Whatsapp Facebook Twitter Youtube

Om Prakash Chandrakar
Kushalpur
Raipur Chhattishgarh
email: jayjohar2017@gmail.com

Category

  • छॉलीवुड समाचार
  • हमर रचनाकार
  • सियासत
  • नवा छत्तीसगढ़
Jayjohar
© Copyright 2023, All Rights Reserved | Jay Johar Media | जय जोहार मीडिया.
  • होम
  • हमर छत्तीसगढ़
  • एक्सक्लूजिव
  • राजनीति
  • छॉलीवुड
  • लाइव
  • हमर रचनाकार
  • जय जोहार चैनल | जोहार पहुना कार्यक्रम
  • जय जोहार चैनल | जोहार सितारा कार्यक्रम
  • जय जोहार चैनल | जोहार सिनेमा कार्यक्रम
  • जय जोहार चैनल | जोहार बिसेस कार्यक्रम
  • poem
  • जय जोहार चैनल | गाना जोहार कार्यक्रम
  • LIVE:भरोसे का सम्मलेन (ठेकवा, राजनांदगांव)
  • जय जोहार चैनल | फिलिम जोहार कार्यक्रम
  • छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेतृत्व गढ़ रहा है विकास के नए सोपान
  • जय जोहार चैनल | काव्य जोहार कार्यक्रम
  • जय जोहार चैनल | जोहार संस्कृति कार्यक्रम
  • जय जोहार | Jay Johar – हमर माटी हमर भाखा | छत्तीसगढ़ी समाचार