संघर्ष अउ भटकाव के बाद मनकू कड़ती के नवा शुरुआत
रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाका मन ले बदलाव के कतको कहानी आगू आवत हे। एही मन म एक कहानी हे बीजापुर जिला के छोटे से गाँव चेरली के रहइया मनकू कड़ती के, जेकर जिंदगी ह संघर्ष, भटकाव अउ फिर एक ठन बने बदलाव के मिसाल बनके दुनिया के आघू आइस हे।
बीजापुर जिला के चेरली गाँव म जनमे मनकू कड़ती के बचपन ह भारी कतका (कठिन) परिस्थिति म बीतिस। गरीबी, असुरक्षा अउ कम साधन के बीच ओकर परिवार ह लगातार समस्या मन ले जूझत रहिस। पारिवारिक स्थिति तब अउ जादा खराब हो गे, जब ओकर ददा ला जेल जाना पड़ीस। ए घटना ह मनकू के मन म गहिर असर करिस अउ ओकर बचपन ह अभाव अउ डर के माहौल म बीतिस।
अइसने परिस्थिति अउ खराब माहौल के सेती मनकू ह धीरे-धीरे गलत रद्दा कोति बढ़े लगिस। ओला लगिस कि गलत रद्दा ले ही ओला पहिचान अउ सुरक्षा मिल सकही। पर ओकर मन म हमेसा एक ठन दुविधा रहिस कि—का एही ओकर भविष्य आय? ये सवाल ओकर मन म बार-बार उठत रहिस। समय के संग मनकू के भीतर आत्मचिंतन सुरू होइस। ओला महसूस होइस कि हिंसा अउ डर के रद्दा म चलके ओ ह अपन जिंदगी ला अंधियारी कोति ले जावत हे। एही अहसास ह ओकर जिंदगी के ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होइस। ओ ह ठान लीस कि अब ओ ह अपन रद्दा बदलही अउ एक ठन नवा शुरुआत करही।
अप्रैल 2025 म मनकू कड़ती ह एक ठन हिम्मत वाला काम करिस अउ आत्मसमर्पण कर दिस। ये फैसला ओकर बर आसान नई रहिस, पर एही ओकर जिंदगी के सब्बो ले बड़का अउ सही फैसला साबित होइस। ए कदम ले ओकर बर मुख्यधारा म लहुटे अउ एक ठन मान-सम्मान के जिंदगी जिये के रद्दा खुल गे। आत्मसमर्पण के बाद ओला पुनर्वास योजना के तहत ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) लेय के मौका मिलीस। ओ ह ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप म ट्रेनिंग लीस, जहाँ ओ ह न केवल भारी मशीन चलाना सीखिस, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी अउ आत्मविश्वास ला घलो अपन जिंदगी म उतारिस। ओकर मेहनत अउ सीखे के इच्छा ह ओकर व्यक्तित्व म बने बदलाव लानिस।
आज मनकू कड़ती एक बदले हुए मनखे के रूप म साम्हु आय हे। ओ ह अब आत्मनिर्भर बने कोति बढ़त हे अउ समाज के दूसर युवा मन बर प्रेरणा बनत हे। जिहाँ पहिली ओकर जिंदगी म डर अउ अस्थिरता रहिस, उहाँ अब आत्मविश्वास अउ नवा उम्मीद ह जगह ले ले हे। मनकू कड़ती के जिंदगी के ये नवा शुरुआत ह ये बात के परमान आय कि कोनो भी परिस्थिति म यदि मनखे ह पक्का निश्चय कर ले, त जिंदगी म बने बदलाव लाना मुमकिन हे।