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इहां लाल आतंक के साया म दम तोड़ देथे सरकारी योजना

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Ambeda's primary health center in stretcher

आमाबेड़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद स्ट्रेचर म हवय

कांकेर : नक्सल प्रभावित इलाका म आवत ही सरकार के तमाम योजना मन दम तोड़ देथे। जिला के अंदरूनी इलाका मन के हालात ए बात ल बयां करत हे। जिला म स्थ्य सेवा मन ए कइसे दम तोड़त हे। आमाबेड़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद स्ट्रेचर म हवय।

ए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसा म 85 गांव के ग्रामीण हे, जे इहां इलाज कराए बर पहुंचथे। लेकिन ए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र 15 बिस्तर वाला हे. जेखर ले ग्रामीण मन ल काफी परेशानी  के सामना करना पड़त हे।

 20 बरिस ले संचालित हे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 

अंतागढ़ के उप-तहसील आमाबेड़ा म पाछू के 20 बरिस ले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित होवत हे। ए इलाका नक्सली मन के गढ़ हे अउ ए इलाका म कई अइसे गांव  घलो हे, जिहां पहुंच पाना संभव नजर नइ आता हे. जेखर वजह ले ए इलाक  म स्वास्थ्य केंद्र नइ खोले जा सकय।

85 गांव के लोग ए हॉस्पिटल के मथा म

तकरीबन 85 गांव के जुम्मेदारी आमाबेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर मन उपर हे. 85 गांव के जुम्मेदारी जे स्वास्थ्य केंद्र म हे. उहां आज घलो मात्र 15 बिस्तर हवय। अगर कोनो मउसमी बेमारी या कोनो अन्य कारनवश मरीज मन के संख्या बढ़ जाए तो मरीज मन ल भर्ती करे बर बिस्तर के सुविधा नइ होवय।

जमीन म लिटाए बर पड़थे मरीज ल

क्षेत्र के जन-प्रतिनिधि मन के दबाव के बाद इहां एक अतिरिक्त कक्ष तो बनाए गे हे, लेकिन मात्र भवन निरमान के बाद एला भी प्रशासन ह भुला देय हे। अइसे म जब मरीज मन के संख्या बढ़ जाथे, त मजबूरन इहां के स्टाफ ल जमीन म लेटाके ग्रामीन मन के इलाज करना पड़थे।

डॉक्टर्स अउ स्टाफ के मेहनत म असुविधा फेरथे पानी

इहां तीन डॉक्टर पदस्थ हवय। जे मन पाछू के 6 ले 7 बरिस से इहां सेवा देवत हे। उमन अइसे   इलाका मन म जाके शिविर लगाथे अउ इलाज करथे। जिहां पहुंचे के रास्ता तक नइए।

तमाम दिक्कत मन के बाद भी ए डॉक्टर अंदरूनी गांव तक पहुंचत हे। ए बीच कोनो ग्रामीन म गंभीर समस्या के पता चलथे अउ ओखर स्वास्थ्य केंद्र लाके इलाज करना चाहथे तो असुविधा एखर आड़े आ जाथे। इहां मरीज ल भर्ती करे बर पर्याप्त बिस्तर तक नइए, अइसे म बाकी सुविधा के बात तो छोड़ दव।

संजीवनी वाहन के घलो हाल बेहाल

मरीज मन ल स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाए जुम्मेदारी संजीवनी वाहन के हे। वास्तव म संजीवनी के जरूरत वो वाहन ल हे, खस्ताहाल वाहन मरीज मन ल जब ले बर जाथे तो कई बार उहीं ल ही धक्का मारत हुए लाना पड़ जाथे।

ए अस्पताल म सेवा देवइया डॉक्टर गौतम बघेल बताथे, बारिस के बेरा म ए क्षेत्र म काम करे म काफी दिक्कत मन के सामना करे बर पड़थे। कई इलाका मन म सड़क नइए। कई इलाका म नाला म पुल नइए, अइसे म अंदरूनी इलाका तक पहुंचके सेवा देना काफी मुसीबत मन ले भरे हुए हे।

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