अब नक्सलवाद नहीं, प्रकृति और संस्कृति से पहचाना जाए बस्तर: सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की पहचान अब उसकी प्राकृतिक खूबसूरती, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं से होनी चाहिए। नवा रायपुर में आयोजित ‘विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026’ में उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बस्तर की तस्वीर राष्ट्रीय स्तर पर नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ी खबरों के जरिए सामने आती रही, जिससे इसकी वास्तविक पहचान पीछे छूट गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में बदली परिस्थितियों के साथ बस्तर में पर्यटन के नए अवसर खुल रहे हैं। सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ अब इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। उनके मुताबिक बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के कारण देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की सकारात्मक कहानियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिए सामने आने से लोगों को इस क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर देखने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटकों को बस्तर की प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय जीवन का अनुभव कराने के साथ क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन के आर्थिक असर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है। स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को भी नए बाजार मिल सकते हैं।
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने निवेश के मोर्चे पर भी छत्तीसगढ़ की संभावनाएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि राज्य के पास उच्च गुणवत्ता वाले खनिज, ऊर्जा संसाधन और कुशल मानव संसाधन मौजूद हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पावर, आईटी, स्टील, टेक्सटाइल, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और अब तक 8.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्तमान में करीब 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और आने वाले वर्षों में इसे 60 हजार मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। वहीं वर्ष 2030 तक स्टील उत्पादन को 45 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। एनर्जी समिट में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आने की बात भी उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक स्थिति और परिवहन नेटवर्क को भी निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। 3,500 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग और विकसित हो रहा रेल नेटवर्क छत्तीसगढ़ को देश के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स के लिए राज्य की स्थिति अनुकूल है और इसके लिए सरकार ने अलग लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की है।