छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान: 2028 तक नई पहचान का लक्ष्य, भोरमदेव कॉरिडोर के लिए ₹146 करोड़ मंजूर
रायपुर , प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा खाका तैयार किया है। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने विभागीय उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप को साझा किया। उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ और नई ‘पर्यटन नीति-2026’ के माध्यम से वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभारा जाएगा।
प्रमुख आंकड़े और महत्वपूर्ण घोषणाएं एक नज़र में
| क्षेत्र / योजना | स्वीकृत राशि / लक्ष्य | मुख्य विवरण |
|---|---|---|
| भोरमदेव कॉरिडोर | ₹145.99 करोड़ | भारत सरकार द्वारा विकास कार्य हेतु स्वीकृति |
| फिल्म सिटी व कन्वेंशन सेंटर | ~₹350 करोड़ | 203.53 करोड़ के निजी निवेश प्रस्ताव प्राप्त |
| पर्यटन विकास मिशन | ₹100 करोड़/वर्ष | अगले 5 वर्षों के लिए वार्षिक वित्तीय प्रावधान |
| श्री रामलला दर्शन योजना | 61 ट्रेनें संचालित | 50,000+ श्रद्धालुओं को अयोध्या-काशी दर्शन |
| निजी भागीदारी (PPP) | 18 पर्यटन संपत्तियां | ₹500 करोड़ निवेश व 1000 रोजगार का अनुमान |
| डिजिटल अभिलेखीकरण | 12 लाख पृष्ठ | ऐतिहासिक दस्तावेजों का ऑनलाइन डिजिटलीकरण |
पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश और रोजगार पर बल
- फिल्म एवं इवेंट टूरिज्म: राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म नीति-2021 में संशोधन किया जा रहा है। फिल्म सिटी और विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए ₹350 करोड़ का खाका तैयार किया गया है।
- स्थानीय रोजगार व होमस्टे: पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने के लिए होमस्टे योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। 500 स्थानीय युवाओं को गाइड, डिजिटल कंटेंट और हॉस्पिटैलिटी का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा।
- चित्रकोट और सिरपुर का कायाकल्प: बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात को अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं सिरपुर के ऐतिहासिक बौद्ध, जैन व हिंदू स्थापत्य के एकीकृत विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार कर यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर के लिए डोजियर केंद्र सरकार को भेजा गया है।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- भोरमदेव व रतनपुर कॉरिडोर: भोरमदेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए ₹145.99 करोड़ मंजूर हो चुके हैं। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र के एकीकृत विकास का प्रस्ताव भी केंद्र को भेजा गया है।
- 2750 साल पुरानी सभ्यता के साक्ष्य: आरंग (रायपुर) के पास रीवां (मृत्तिकागढ़) में पुरातात्विक उत्खनन से 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट, प्राचीन सिक्के और ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो: जनजातीय नायकों (शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर) की शौर्यगाथा और प्रदेश की लोक संस्कृति को दर्शाने के लिए पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो शुरू किया जाएगा।
कलाकारों का कल्याण और डिजिटल आर्काइव
- मासिक पेंशन व चिकित्सा सहायता: ‘कलाकार कल्याण कोष’ से बीते ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को ₹30 लाख से अधिक की चिकित्सा सहायता दी गई। वहीं 407 अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों व साहित्यकारों को ₹82.12 लाख की पेंशन प्रदान की गई है।
- बस्तर पंडुम और आदि पर्व: बस्तर की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘बस्तर पंडुम’ का सफल आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में विजेता कलाकारों के 209 सदस्यीय दल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
- डिजिटल आर्काइव: छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, कलाओं और इतिहास से जुड़े 12 लाख अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर ‘वेब अभिलेखागार पोर्टल’ के जरिए शोधार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।