26 वर्षों में बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर, शांति, सुशासन और विकास से गढ़ रहा उज्ज्वल भविष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मीय पत्र बना प्रदेश की विकास यात्रा और उपलब्धियों का प्रतिबिंब
अंजोर विजन 2047 के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम
छत्तीसगढ़ ने अपनी स्थापना के 26 वर्षों के सफर में अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए विकास और बदलाव की नई इबारत लिखी है। एक नवंबर 2000 को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में अस्तित्व में आए इस राज्य ने आज अपनी अलग पहचान स्थापित की है। प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, मेहनतकश किसानों और प्रतिभाशाली युवाओं की धरती छत्तीसगढ़ अब शांति, सुशासन, औद्योगिक विकास और आधुनिक अधोसंरचना के नए आयाम गढ़ रहा है।
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को लिखा गया आत्मीय पत्र छत्तीसगढ़ की इसी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में प्रदेश से अपने पुराने आत्मीय संबंधों को याद करते हुए सरगुजा के वनांचलों से लेकर बस्तर की धरती तक की यात्राओं के अनुभव साझा किए हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता, जनकल्याणकारी योजनाओं और तेजी से विकसित हो रही अधोसंरचना की सराहना की है।
नक्सलवाद के अंधकार से शांति और विश्वास की नई सुबह
छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय तक नक्सलवाद रहा है। विशेषकर बस्तर के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में हिंसा तथा असुरक्षा के कारण विकास की गति प्रभावित होती रही। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में इस बदलाव का विशेष उल्लेख करते हुए कहा है कि कभी नक्सलवाद के रेड कॉरिडोर के रूप में पहचाने जाने वाले क्षेत्र आज शांति, विश्वास और विकास के नए केंद्र बन रहे हैं।
सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय नागरिकों के सहयोग और केंद्र तथा राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से माओवादी आतंक के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। इसका सकारात्मक असर अब बस्तर के जनजीवन में दिखाई देने लगा है। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहा है।
बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन युवाओं की प्रतिभा और क्षेत्र में लौटते विश्वास के प्रतीक बन रहे हैं। नियद नेल्ला नार, आजीविका उन्नयन योजना और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर जैसी पहलें स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कभी भय और असुरक्षा से पहचाने जाने वाले क्षेत्रों में अब शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं।
सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से विकास को नई गति
किसी भी राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मजबूत परिवहन व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। छत्तीसगढ़ में बीते वर्षों के दौरान सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार ने विकास की संभावनाओं को नई दिशा दी है।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि दिल्ली और रायपुर के बीच कभी दिनभर में केवल एक उड़ान उपलब्ध हुआ करती थी, जबकि आज प्रदेश में चार आधुनिक हवाई अड्डों का नेटवर्क विकसित हो चुका है। इसी प्रकार 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं से प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिली है।
रायपुर और बिलासपुर के बीच सड़क मार्ग से यात्रा का समय लगभग आधा होने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को भी प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विशाखापत्तनम और रांची-धनबाद जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले मार्ग आने वाले समय में व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।
गरीब कल्याण और सामाजिक सुरक्षा बनी विकास की आधारशिला
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने पत्र में गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के 73 लाख जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 22 लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं 41 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया है और करीब 40 लाख परिवारों को गैस कनेक्शन का लाभ मिला है।
लगभग ढाई करोड़ आयुष्मान कार्डों के माध्यम से नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार को सम्मानजनक जीवन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए। विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा।
किसानों की समृद्धि से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
छत्तीसगढ़ को देश के धान का कटोरा के रूप में जाना जाता है। यहां की अर्थव्यवस्था में कृषि और किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में धान खरीदी की मजबूत व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के 25 लाख से अधिक किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
धान खरीदी की प्रभावी व्यवस्था से किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना जैसी पहलें कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
कृषि के साथ सिंचाई, आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की महत्वपूर्ण शर्त है।
महतारी वंदन से नारीशक्ति को मिला आर्थिक संबल
छत्तीसगढ़ के विकास में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में महतारी वंदन योजना का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से 68 लाख से अधिक माताओं और बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि भेजी जा रही है।
इस आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही परिवार की आर्थिक गतिविधियों में उनकी भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो रही है।
महिला स्व-सहायता समूहों, बिहान मिशन और स्वरोजगार आधारित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी और उद्यमिता को बढ़ावा देना प्रदेश के समावेशी विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
शिक्षा और कौशल विकास से युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर
छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि एम्स, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, आईआईएम और निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान युवाओं के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।
उच्च शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएम-सेतु और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना जैसी पहलें युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायक हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सरगुजिहा जैसी स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों में प्राथमिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। इससे जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा तथा उनकी सांस्कृतिक पहचान भी संरक्षित रहेगी।
नवा रायपुर बन रहा आधुनिक तकनीक और निवेश का नया केंद्र
छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री ने नवा रायपुर को आधुनिक शहर के रूप में उभरता देखकर प्रसन्नता व्यक्त की है।
इंडिया एआई मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप प्रदेश में नई तकनीक से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मा, टेक्सटाइल, सूचना प्रौद्योगिकी, बिजली, एल्युमिनियम और स्टील जैसे क्षेत्रों में निवेश की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
नवा रायपुर में आयोजित ऑल इंडिया स्टील कॉन्क्लेव 2.0 और ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट ने प्रदेश को औद्योगिक क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का काम किया है।
प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रतिभाशाली मानव संसाधन छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए अनुकूल बनाते हैं। इन अवसरों का लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सांस्कृतिक विरासत छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान
आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजकर रखना भी छत्तीसगढ़ की विशेषता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने पत्र में प्रदेश की लोककलाओं, लोकभाषाओं और जनजातीय परंपराओं को देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बताया है।
छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और संत गुरु घासीदास जी की पावन जन्मभूमि है। यहां कबीरपंथ की समतामूलक विचारधारा की गहरी छाप है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, पंथी नृत्य, राउत नाचा, कर्मा-सुआ, पंडवानी और लोकगीत प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाते हैं।
पद्म विभूषण तीजन बाई की पंडवानी ने छत्तीसगढ़ की लोकगाथा परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्रदेश के पारंपरिक पर्व, हस्तशिल्प, जनजातीय जीवनशैली और लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय देती हैं।
आज आवश्यकता है कि इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार से भी जोड़ा जाए, ताकि सांस्कृतिक विरासत आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन सके।
अंजोर विजन 2047 : विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ सरकार के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर विजन’ की सराहना करते हुए इसे विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत के संकल्प को नई दिशा देने वाला बताया है।
वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, तकनीक और अधोसंरचना के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति आवश्यक है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के संसाधनों और संभावनाओं को विकास के अवसरों में बदलने की दिशा में प्रयासरत है। बस्तर और सरगुजा जैसे जनजातीय अंचलों का समग्र विकास, युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की समृद्धि और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता इस यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
26 वर्षों की यात्रा, भविष्य के लिए नई उम्मीदें
छत्तीसगढ़ के 26 वर्षों का सफर संघर्ष, संकल्प और संभावनाओं की कहानी है। राज्य गठन के समय जिन चुनौतियों के बीच विकास की यात्रा शुरू हुई थी, आज उन्हीं चुनौतियों को अवसरों में बदलने के प्रयास दिखाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री का आत्मीय पत्र प्रदेश की उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ भविष्य के लिए नई जिम्मेदारियों का भी संदेश देता है। विकास का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा, जब दूरस्थ गांवों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचें, किसानों की समृद्धि सुनिश्चित हो, युवाओं को रोजगार मिले, महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन का अवसर प्राप्त हो।
छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यह यात्रा अब नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रही है। शांति, सुशासन, जनभागीदारी और आधुनिक विकास के आधार पर प्रदेश विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। अंजोर विजन 2047 इसी उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है।