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खबर छत्तीसगढ़

‘पावस प्रसंग’ में शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत से साकार हुई वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा

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August 22, 2026 4 Mins Read
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प्रकृति के उल्लास, पावस के सौंदर्य और मानवीय संवेदनाओं को कलाकारों ने दी भावपूर्ण अभिव्यक्ति

रायपुर, संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा और वर्षा ऋतु के सौंदर्य को समर्पित शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत कार्यक्रम ‘पावस प्रसंग’ का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने अपने नृत्य, संगीत और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से वर्षा ऋतु के विविध रंगों, प्रकृति के उल्लास, मन के भावों और पावस से जुड़े सौंदर्यबोध को जीवंत कर दिया। शास्त्रीय कलाओं की मनोहारी प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को वर्षा की रिमझिम फुहारों, प्रकृति की हरियाली और पावस के भावलोक का सजीव अनुभव कराया।

कार्यक्रम में राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने वर्षा ऋतु की विशेषताओं को अभिव्यक्त करती सुमित्रानंदन पंत की कविता का भावपूर्ण पाठ किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वर्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। प्रदेश की कृषि व्यवस्था सहित जनजीवन की अनेक गतिविधियां वर्षा पर निर्भर हैं। वर्षा प्रकृति को नवजीवन प्रदान करती है और इसके बिना हरियाली, कृषि समृद्धि तथा प्रकृति की जीवंतता की कल्पना कठिन है।

मिश्रा ने कहा कि वर्षा और प्रकृति के इस गहरे संबंध को भारतीय साहित्य, संगीत और नृत्य परंपरा ने सदियों से अपने-अपने ढंग से अभिव्यक्त किया है। भारतीय शास्त्रीय कलाओं में ऋतुओं और प्रकृति के विविध रूपों का विशेष स्थान रहा है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को केंद्र में रखकर आयोजित ‘पावस प्रसंग’ वर्षा ऋतु के सौंदर्य, संवेदना और सांस्कृतिक महत्ता को जनमानस तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है।

शास्त्रीय गायन और नृत्य ने बांधा समां

‘पावस प्रसंग’ में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण और आकर्षक बना दिया। आराध्या कुमारी सिंह ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देकर पावस ऋतु के भावों को सुरों में पिरोया। उनके गायन ने वातावरण को संगीत की मधुरता से भर दिया।

ताक्षवी गौतम ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से वर्षा ऋतु की भाव-भंगिमाओं और प्रकृति के सौंदर्य को साकार किया। वहीं तरुण शर्मा एवं साथी कलाकारों ने कथक नृत्य की प्रस्तुति देकर ताल, लय, भाव और पद-संचालन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। आँचल पांडेय ने भी ओडिसी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पावस ऋतु के विविध भावों और रंगों को मंच पर सजीव रूप प्रदान किया।

कलाकारों को मंच और प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

‘पावस प्रसंग’ केवल वर्षा ऋतु के सौंदर्य को कला के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षण और संवर्धन देने के साथ कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। ऐसे आयोजनों से शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत के कलाकारों को अपनी साधना, प्रतिभा और रचनात्मकता को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में प्रकृति और ऋतुओं के महत्व को भी रेखांकित किया गया। वर्षा ऋतु भारतीय लोकजीवन, साहित्य, संगीत और नृत्य में सदैव प्रेरणा का स्रोत रही है। ‘पावस प्रसंग’ ने इसी समृद्ध परंपरा को आधुनिक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

संस्कृति संचालक डॉ. संजय कनौजे ने किया कलाकारों का उत्साहवर्धन

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कनौजे की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उप संचालक उमेश मिश्रा, उदय सिंह चौहान, वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार दीपेंद्र दीवान, वरिष्ठ कलाकार रिखी क्षत्रिय एवं विजय मिश्रा सहित कला एवं साहित्य जगत से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्कृति संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि ‘पावस प्रसंग’ छत्तीसगढ़ के कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उन्हें राज्य स्तर पर मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से कला एवं संस्कृति से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा और वर्षों की साधना को प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने तथा कला-संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. कनौजे ने कहा कि ‘पावस प्रसंग’ के माध्यम से वर्षा ऋतु से जुड़े सौंदर्यबोध, प्रकृति के प्रति संवेदना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कला प्रेमियों और आम नागरिकों से ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करने का आग्रह किया।

पावस के रंगों में रंगा सांस्कृतिक मंच

‘पावस प्रसंग’ में शास्त्रीय गायन की मधुरता, ओडिसी की भावपूर्ण भंगिमाओं और कथक की ताल-लय ने मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित किया, जिसमें वर्षा ऋतु केवल प्रकृति की घटना न रहकर संगीत, नृत्य, साहित्य और संवेदना का उत्सव बन गई। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को पावस के सौंदर्य से जोड़ते हुए भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा की समृद्ध विरासत का अनुभव कराया।

 प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वर्षा की बूंदों से लेकर खेतों की हरियाली और मनुष्य के भावों तक, पावस जीवन के अनेक रंगों को अपने भीतर समेटे हुए है। संस्कृति विभाग का यह आयोजन इन्हीं रंगों को शास्त्रीय कला के माध्यम से मंच पर साकार करने का सुंदर प्रयास रहा।

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