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एनपीके- एसएसपी मिलाकर उपयोग करने से डीएपी की पूर्ति संभव

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July 4, 2025 4 Mins Read
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डीएपी खाद के स्थान पर दूसरी खादों को मिलाकर खेतों में डालने की सलाह

रायपुर. पूरे देश में डीएपी खाद की संभावित कमी को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने डीएपी खाद के स्थान पर अन्य दूसरी खादों का उपयोग करने की सलाह किसानों को दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए डीएपी के स्थान पर 52 किलो यूरिया, एक सौ किलो सुपर फास्फेट और 13 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग करने की सलाह दी है। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की 50 किलो मात्रा, यूरिया की 39 किलो मात्रा को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की जल्दी पकने वाली धान की किस्म के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 80 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 18 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 13 किलो मात्रा को मिलाकर भी जल्दी पकने वाली धान के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है। 

कृषि विशेषज्ञों ने धान की लम्बी अवधि की 140 दिन से अधिक में पकने वाली किस्मों के लिए भी मिश्रित खादों की अनुशंसा की है। धान की लम्बी अवधि की फसलों में डीएपी के स्थान पर 70 किलो यूरिया, 125 किलो सुपर फास्फेट और 20 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग करने की सलाह दी है। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की 62 किलो मात्रा, यूरिया की 54 किलो और पोटाश की 4 किलोग्राम मात्रा को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की लम्बी अवधि में पकने वाली धान की किस्म के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 100 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 26 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 20 किलो मात्रा को मिलाकर भी देर से पकने वाली धान के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है। 

कृषि वैज्ञानिकों ने धान की मध्यम अवधि में 125-140 दिन में पकने वाली किस्मों के लिए डीएपी के स्थान पर 87 किलो यूरिया, 150 किलो सुपर फास्फेट और 27 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग करने की सलाह दी है। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की 75 किलो मात्रा, यूरिया की 67 किलो  और पोटाश की सात किलोग्राम मात्रा को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की मध्यम अवधि की धान की किस्म के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 120 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 35 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 27 किलो मात्रा को मिलाकर भी मध्यम अवधि की धान के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों ने हाईब्रिड धान की किस्मों के लिए डीएपी के स्थान पर 113 किलो यूरिया, दो सौ किलो सुपर फास्फेट और 40 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग करने की सलाह दी है। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की एक सौ किलो मात्रा, यूरिया की 86 किलो मात्रा  और पोटाश 13 किलोग्राम को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की हाईब्रिड धान के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 160 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 44 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 40 किलो मात्रा को मिलाकर भी हाईब्रिड धान के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों ने मक्का फसल के लिए भी डीएपी के स्थान पर दूसरे खाद समूह को खेतों मे डालने की सलाह किसानों को दी है। मक्का की संकुल किस्मों के लिए किसान 70 किलो यूरिया, एक सौ किलो सुपर फास्फेट और 20 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की 50 किलो मात्रा, यूरिया की 56 किलो और पोटाश की 7 किलो मात्रा को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की मक्का की फसल में उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 80 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 35 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 20 किलो मात्रा को मिलाकर भी मक्के की संकुल किस्म की फसल के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है। 

मक्के की हाईब्रिड किस्मों के लिए किसान डीएपी की कमी होने पर 87 किलो यूरिया, 150 किलो सुपर फास्फेट और 27 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह एनपीके 12ः32ः16 खाद की 75 किलो मात्रा, यूरिया की 67 किलो और पोटाश की 7 किलो मात्रा को भी एक साथ मिलाकर एक एकड़ की हाईब्रिड मक्का की फसल में उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह कॉम्पलेक्स खाद 20ः20ः00ः13 की 120 किलोग्राम मात्रा, यूरिया की 35 किलोग्राम मात्रा और पोटाश की 27 किलो मात्रा को मिलाकर भी मक्के की हाईब्रिड किस्म की फसल के एक एकड़ खेत में उपयोग किया जा सकता है।

सोयाबीन और मूंगफली की फसल लगाने वाले किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने डीएपी की कमी होने पर 17 किलो यूरिया, 200 किलो सुपर फास्फेट और 13 किलो पोटाश मिलाकर एक एकड़ फसल में उपयोग करने की सलाह दी है। इसी तरह किसान सोयाबीन और मूंगफली की फसल में एनपीके 12ः32ः16 खाद की 100 किलोग्राम एक एकड़ की फसल में उपयोग कर सकते हैं।

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