पति के निधन के बाद खेती बनी सहारा, बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला
टमाटर-खीरे की खेती से बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहीं सरगुजा की उर्मिला
स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर बढ़ाया खेती का काम, पूरी राशि चुकाकर अब लखपति दीदी बनने की राह पर
रायपुर, जिंदगी में मुश्किलें आईं, लेकिन सरगुजा जिले की उर्मिला गुप्ता ने हिम्मत नहीं छोड़ी। पति के निधन के बाद जब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई, तब खेती उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और आकांक्षा स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने टमाटर, खीरा और दूसरी सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका बना लिया। आज इसी कमाई से वे अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं।
घर की दहलीज से खेत तक का सफर
बिहान से जुड़ने से पहले उर्मिला का ज्यादातर समय घर तक ही सीमित था। खेती को व्यवस्थित रूप से आय का जरिया बनाने का विचार भी उनके मन में नहीं था। आकांक्षा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सब्जी उत्पादन और आजीविका गतिविधियों की जानकारी मिली। समूह से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें खेती को नए तरीके से देखने और खुद की आमदनी शुरू करने का हौसला दिया।
इसके बाद उर्मिला ने टमाटर की खेती शुरू की। पिछले चार वर्षों से वे लगातार टमाटर का उत्पादन कर रही हैं। इसके साथ ही खीरा और दूसरी सब्जियां भी उगाकर स्थानीय स्तर पर बेच रही हैं।
समूह से लिया ऋण, खेती बढ़ाई और चुकाया भी
खेती का दायरा बढ़ाने के लिए उर्मिला ने स्व-सहायता समूह से ऋण लिया। इस राशि को उन्होंने खेती और सब्जी उत्पादन में लगाया। उत्पादन बढ़ा तो आमदनी भी बढ़ने लगी। उर्मिला ने कमाई का बेहतर प्रबंधन करते हुए समूह से लिया पूरा ऋण समय पर चुका दिया।
ऋण चुकाने के इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक फैसले लेने का आत्मविश्वास भी दिया। अब वे अपनी खेती को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
पति के जाने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाली
वर्ष 2024 में पति के निधन के बाद उर्मिला के सामने परिवार चलाने के साथ दोनों बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी भी आ गई। ऐसे समय में सब्जियों की खेती उनके परिवार की आय का मजबूत जरिया बनी। उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खेत को ही अपने संघर्ष और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया।
आज उर्मिला खेती से होने वाली आमदनी से बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें पूरी कर रही हैं। उनका कहना है कि मेहनत और सही अवसर मिले तो मुश्किल परिस्थितियों में भी आगे बढ़ा जा सकता है।
अब लखपति दीदी बनने की ओर
बिहान और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उर्मिला को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं दिया, बल्कि अपने फैसले खुद लेने का आत्मविश्वास भी दिया। टमाटर, खीरा और अन्य सब्जियों की खेती से लगातार आय अर्जित करते हुए अब वे लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उर्मिला ने बिहान के जरिए मिले सहयोग और आजीविका के अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनकी कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और मेहनत के साथ ग्रामीण महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार के लिए मजबूत सहारा बन सकती हैं।