नारायणपुर में पीएम आवास योजना से संवर रही हैं खुशियाँ: मिट्टी-फूस की झोपड़ियों की जगह ले रहे पक्के आशियाने
रायपुर, ‘रोटी, कपड़ा और मकान’—ये जीवन की तीन ऐसी बुनियादी जरूरतें हैं, जिन्हें हासिल करने के लिए इंसान ताउम्र संघर्ष करता है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण इलाकों में, जहाँ आजीविका के साधन सीमित और चुनौतियाँ असीमित होती हैं, वहाँ अपने परिवार के लिए एक पक्के मकान का सपना सच करना बेहद कठिन होता है।
लेकिन जब इसी सपने को साकार करने के लिए शासन का मजबूत संबल और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो संघर्षों से भरे जीवन में एक सुखद बदलाव आ जाता है। नारायणपुर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और पीएम जनमन (प्रधानमंत्री आदिवासी न्याय महाअभियान) जैसी योजनाएँ ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली की नई बयार लेकर आई हैं।
कच्ची झोपड़ियों की जगह ले रहे पक्के मकान
नारायणपुर के सुदूर ग्राम पंचायतों में अब मिट्टी और फूस की कच्ची झोपड़ियों की जगह पक्के आशियाने आकार ले रहे हैं:
- खुशी और जश्न का माहौल: जिन परिवारों के घर बनकर तैयार हो चुके हैं, वे विधिवत गृह-प्रवेश और पूजा-अनुष्ठान के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।
- नई शुरुआत: जिन्हें नए आवास की स्वीकृति मिली है, वे भूमि-पूजन कर इस बदलाव का जश्न मना रहे हैं।
दो वर्षों में 6 हज़ार परिवारों को मिली पक्के घर की सौगात
नारायणपुर जिले में योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और तेज़ी से किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-26 के दौरान जिले के विकास को नई रफ्तार मिली है:
| विवरण | आंकड़े |
| स्वीकृत आवास (पात्र परिवार) | 6,000+ |
| प्रथम किस्त प्राप्त हितग्राही | 4,000 |
| पूरी तरह बनकर तैयार मकान | 1,650 |
शेष मकानों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरणों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
सुदूर अबूझमाड़ के वनांचलों तक पहुँचा विकास का उजाला
नारायणपुर का एक बड़ा हिस्सा दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ अत्यंत पिछड़ी जनजाति ‘अबूझमाड़िया’ समुदाय के लोग निवास करते हैं।
“भौगोलिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अबूझमाड़ के वनांचलों में पक्के मकानों का निर्माण यह दर्शाता है कि विकास की यह बयार अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही है।”
- व्यापक सर्वेक्षण: पीएम जनमन योजना के तहत दूरस्थ इलाकों में अब तक 4,892 विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है।
- स्वीकृति और निर्माण: सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 2,390 परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 315 पक्के मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं।
विशेष परियोजनाओं से मिला पुनर्वास और नया भरोसा
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ‘स्पेशल प्रोजेक्ट’ के तहत विशेष कदम उठाए जा रहे हैं:
- मुख्यधारा में वापसी: आत्मसमर्पित व्यक्तियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन दिया जा रहा है।
- प्रगति स्थिति: इस पहल के तहत 649 हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 410 लोगों को प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है और 13 परिवार अपने नए पक्के मकानों में शिफ्ट भी हो चुके हैं।
सुरक्षित भविष्य और सशक्त ग्रामीण जीवन
प्रधानमंत्री आवास योजना ने केवल ईंट-सीमेंट के मकान खड़े नहीं किए हैं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मविश्वास और जीवन स्तर में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया है। सिर पर अपनी पक्की छत होने से ग्रामीण अब अपने और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त और सशक्त महसूस कर रहे हैं। योजना का यह मानवीय पहलू नारायणपुर के वनांचलों में उम्मीद और खुशहाली की एक नई इबारत लिख रहा है।