चार बेटियों के सपनों को संवार रहीं इंदु लता, डेयरी व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
सक्षम योजना से मिला एक लाख रुपये का ऋण, दो भैंसों से रोजाना करीब 20 लीटर दूध का उत्पादन
एक बेटी मेडिकल कॉलेज में, दूसरी कर रही इंजीनियरिंग की पढ़ाई; मां के संघर्ष ने परिवार को दी नई दिशा
रायपुर, पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश और उनके भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी इंदु लता गुप्ता के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्वरोजगार का रास्ता चुना। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की मदद से उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया। आज दो भैंसों से प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध का उत्पादन कर वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां भी स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
पति के निधन के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी
सरगुजा जिले की रहने वाली इंदु लता गुप्ता के लिए पति के निधन के बाद जीवन की परिस्थितियां बदल गईं। चार बेटियों की परवरिश, घर का खर्च और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी अकेले निभाना आसान नहीं था। नियमित आय का साधन नहीं होने से परिवार की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी होती थी। इसके बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।
इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना की जानकारी मिली। कम ब्याज पर ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू करने के अवसर ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने की राह दिखाई।
एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय
इंदु लता ने सक्षम योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण लिया और अपनी बचत की राशि मिलाकर दो भैंसें खरीदीं। इसके बाद उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और मेहनत से इसे अपनी आजीविका का प्रमुख साधन बनाया।
वर्तमान में दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की बिक्री से होने वाली आमदनी से उन्हें घर की जरूरतें पूरी करने और बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद मिल रही है। स्वरोजगार शुरू होने से परिवार को आय का नियमित साधन मिला है और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।
बेटियों की पढ़ाई बनी सबसे बड़ी उपलब्धि
इंदु लता के संघर्ष का सबसे सुखद परिणाम उनकी बेटियों की शिक्षा में दिखाई देता है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों के सपनों को अधूरा नहीं रहने दिया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है, जबकि दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। उनकी दो अन्य बेटियां भी स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल करते देखना इंदु लता के लिए गर्व और संतोष का विषय है। उनका सपना है कि चारों बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और अपने जीवन में सफलता हासिल करें। डेयरी व्यवसाय से मिलने वाली आय ने इस सपने को पूरा करने की दिशा में उन्हें आर्थिक सहारा दिया है।
सक्षम योजना से बढ़ा आत्मविश्वास
इंदु लता गुप्ता के लिए छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना केवल ऋण प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बनी। आर्थिक सहयोग मिलने से वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकीं और परिवार की जिम्मेदारियां अधिक आत्मविश्वास के साथ निभाने लगीं।
उन्होंने योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने और बेटियों की शिक्षा जारी रखने में मदद मिली है।
सेवा संकल्प अभियान में महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल
सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत इंदु लता गुप्ता की कहानी महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार और बेटियों की शिक्षा के महत्व को सामने लाती है। पति के निधन के बाद आई कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपने परिवार को नई दिशा दी।
दो भैंसों से शुरू हुआ उनका डेयरी व्यवसाय आज परिवार की आजीविका का सहारा है। उनकी कहानी बताती है कि सही अवसर और आर्थिक सहयोग मिलने पर महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इंदु लता की मेहनत और बेटियों को शिक्षित बनाने का संकल्प उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।