महतारी वंदन से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी, बढ़ी आत्मनिर्भरता
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के पेंड्रा विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी की 40 वर्षीय ईश्वरी मरकार के लिए महतारी वंदन योजना से मिलने वाली हर महीने की एक हजार रुपये की राशि आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर साबित हो रही है। इस राशि का उपयोग उन्होंने घर के पीछे की जमीन पर सब्जी-बाड़ी विकसित करने में किया। अब यहां उगने वाली ताजी सब्जियां परिवार के काम आ रही हैं, जबकि अतिरिक्त उपज की बिक्री से ईश्वरी को आमदनी भी हो रही है।
ईश्वरी के लिए यह बदलाव आसान नहीं था। पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कई बार दूसरों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। सीमित आय के बीच घरेलू खर्च और बच्चों की पढ़ाई की जरूरतें पूरी करना चुनौती बना रहता था। कई बार जरूरी काम के लिए भी समय पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाती थी, जिससे परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
महतारी वंदन योजना के तहत नियमित रूप से मिलने वाली राशि ने उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद की। ईश्वरी के मुताबिक अब छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हुई है। हर महीने खाते में आने वाली निश्चित राशि ने उन्हें अपने खर्च की बेहतर योजना बनाने और कुछ राशि को आय बढ़ाने वाले काम में लगाने का अवसर दिया।
ईश्वरी ने इसी राशि का एक हिस्सा घर के पीछे सब्जी-बाड़ी तैयार करने में लगाया। उन्होंने उपलब्ध जमीन पर अलग-अलग प्रकार की सब्जियां उगानी शुरू कीं। इससे परिवार को घर की जरूरत की सब्जियां मिल जाती हैं और अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेचकर आमदनी भी हो रही है। इस तरह छोटी-सी बाड़ी परिवार के खर्च को कम करने के साथ आय का एक अतिरिक्त जरिया बन गई है।
योजना की राशि का उपयोग ईश्वरी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में भी कर रही हैं। हर महीने मिलने वाली निश्चित सहायता से परिवार के बजट में राहत मिली है। ईश्वरी का कहना है कि आर्थिक सहारे ने उन्हें केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में मदद नहीं की, बल्कि अपनी मेहनत से आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है।
दूरस्थ वनांचल गांव बम्हनी में ईश्वरी की सब्जी-बाड़ी अब उनके बदलते जीवन की तस्वीर बन गई है। कभी छोटी जरूरतों के लिए उधार लेने वाली ईश्वरी आज अपनी मेहनत से परिवार की आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल उनके लिए आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार बना है।