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20 अगस्त पुण्यतिथि म सुरता : त्याग अउ करुणा के देवी रहिन नगरमाता बिन्नी बाई सोनकर

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August 20, 2023 5 Mins Read
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sushil bhole

सुशील भोले, संजय नगर रायपुर

“मैं नून चटनी म बासी खाके जी लेहूं फेर कोनो किसम के सरकारी सहायता नइ झोंकव” ए कहना रिहिस रायपुर नगर निगम द्वारा नगरमाता के उपाधि ले सम्मानित बिन्नी बाई सोनकर के. आज के बेरा म जब लोगन अपन अंगरी के नख ल कटा के शहीद होए के या कुछ एती-तेती के उदिम कर के समाजसेवी अउ दानदाता होए के देखावा करत सरकारी पद अउ पइसा झोंके बर लुलुवालत रहिथें, अइसन बेरा म हमन बिन्नी बाई सोनकर सहीं वइसनो देवी के साक्षात दर्शन करे हावन, जेन ह अपन पैतृक खेती-खार के संगे-संग साग-भाजी बेच-बेच के अपन जिनगी भर के सकेले पइसा ल लोककल्याण के कारज सेती दान कर दिए रिहिसे अउ जब सरकार ह बदला म उंकर बुढ़ापा ल देखत मासिक पेंशन दे खातिर घोषणा करिस त वो सोज्झे कहि दिस- “मैं नून चटनी म बासी खाके जी लेहूं फेर सरकार के कोनो किसम के सहयोग नइ झोंकौं.”

रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित सोनकर पारा म घुटरू सोनकर अउ महतारी रामबाई के घर सन् 1927 म जनमे बिन्नी बाई सोनकर ल हमन छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के सदस्य रहे रामबिशाल सोनकर के माध्यम ले जानेन. तब हमू मन साहित्य समिति के सदस्य रेहेन, अउ हर इतवार के टिल्लू चौक के देवबती सोनकर धरमशाला म होवइया कवि गोष्ठी म जावत रेहेन. रामबिशाल जी बिन्नी बाई के भतीजा रिहिस, जेकर संग जा-जा के ही बिन्नी बाई ह जम्मो किसम के दान-धरम अउ सामाजिक कारज ल करय. रामबिशाल जी हमन ल बिन्नी बाई के समाजसेवा अउ दानशीलता के बारे म बतावंय तब हमूं मन बिन्नी बाई के घर उंकर संग भेंट करे बर चल देवत रेहेन.

ए बात ल तो सबो जानथें, के तइहा के बेरा म सियान मन पढ़ई-लिखई ल जादा महत्व नइ देवत रिहिन हें. तेमा नोनी मनला पढ़ाए के तो चेते नइ करत रिहिन हें. एकर ले जादा उंकर मन जगा रंधना-गढ़ना अउ खेती-किसानी के बुता जादा करवाए जाय. बिन्नी बाई ल घलो स्कूल के बदला रंधनी खोली अउ पैतृक धंधा बारी-बखरी म भेज दिए गिस. संग म बारी के साग-भाजी टोरई अउ बजार लेग के बेचई म लगा दिए गिस.

उमर के बाढ़ते उंकर बिहाव ल भांठागांव के आंधू सोनकर संग कर दिए गिस. बिहाव के दू बछर के होवत उन एक नोनी के महतारी घलो बनगें, जेकर नांव धरिन फागन. तभो बिन्नी बाई ल ससुरार के जइसन सुख मिलना रिहिस, तइसन नइ मिलिस. उंकर जांवर-जोड़ी के संगति ह बने नइ रिहिस, तेकर सेती वो पियई-खवई अउ जुआ-चित्ती के चिभिक म बुड़गे राहय.
ए बीच बेटी फागन ह बर-बिहाव के लाइक होगे, त फेर वोकरो बिहाव ल रायपुरे के रामकुंड म बसंत सोनकर संग कर दिस. एकर खातिर बिन्नी बाई ल अपन महतारी-ददा के सहयोग लेना परिस.

बेटी के बिदा करे के बाद तो बिन्नी बाई के जिनगी अउ जादा पीरा म समागे, त थक-हार के वोहा अपन ससुरार ल छोड़ के अपन मइके आगे, अउ इहें अपन पुरखौती रोजगार म हाथ बटाए लागिस. रोज पुरानी बस्ती ले रामकुंड के बारी रेंगत जावय. उहाँ कुआँ म टेड़-टेड़ के साग-भाजी के कियारी मन म पानी पलोवय अउ टोरे के लाइक साग-भाजी ल टोर के बजार लेगय अउ अपन सियान के पसरा म बइठ के उनला बेंचय. जब जमो बेचा जावय त रतिहा 8-9 के बजत घर लहुट आवय.

कुछ दिन बाद उंकर महतारी सियान दूनों वोला छोड़ के ये दुनिया ले बिरादरी ले लेइन. तब बिन्नी बाई निच्चट अकेल्ला रहिगे. काबर ते वोकर बेटी घलो अपन घर-परिवार म रमगे राहय, वो अपन दाई-ददा के कभू सोर नइ लेवत राहय. दाई-ददा के सरग सिधारे के बाद बिन्नी बाई के जिनगी भइगे मशीन बरोबर होगे राहय, सूत के उठे ले लेके रतिहा सोवा के परत ले बस काम काम अउ काम. इही बीच वोकर मन म भाव जागिस- आखिर ए सब मैं काकर बर करत हौं? आखिर अतका पइसा ल मैं का करहूं? नता-गोता मन तो मोर ए पइसा खातिर लड़ई-झगरा मता डारहीं. तेकर ले कुछ अइसे करे जाय जेकर ले गरीब गुरबा मन के मदद हो जाय, मैं उंकर सहारा बन जावंव.

तब उन अपन जम्मो धन-दोगानी ल जनकल्याण के कारज म लगाए के गुनिस. सबले पहिली वो ह अपन घरे जगा के लोहार चौक म शिव मंदिर बनवाइस. अपन खुद तो पढ़-लिख नइ पाए रिहिसे, तेकर पीरा जानत 1987-88 म अपन कुशालपुर रिंग रोड के जमीन ल बेच के रामकुंड म एक प्रायमरी स्कूल खोलवाइस. ए स्कूल ल अभी बिन्नी बाई सोनकर के नांव ले ही जाने जाथे.

सन् 1993 म जब उन इलाज खातिर इहाँ के बड़े अस्पताल पं. जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल हास्पिटल म भर्ती रिहिस, त देखिस के उहाँ इलाज करवाए बर दुरिहा-दुरिहा के लोगन आथें. फेर उंकर रूके-ठहरे खातिर उहाँ कुछुच नइए, खाए-पीए बर बने गतर के जगा नइए. ए सबला देख के उंकर मन म पीरा जागिस अउ वो उहाँ धरमशाला बनवाए के गुनिस. एकर खातिर उन अपन जिनगी भर म साग-भाजी बेंच-बेंच के जोड़े 10 लाख रुपिया ल सरकार ल दे दिए रिहिसे ए धरमशाला के कारज वतका म पूरा नइ हो पाइस त पांच लाख अउ दिए रिहिन हें. जेकर ले बने धरमशाला के 1997 म बिन्नी बाई के नांव ले ही उहाँ उद्घाटन होइस. तब के मुख्यमंत्री ह वो धरमशाला के उद्घाटन करत बिन्नी बाई ल हर महीना एक हजार रुपिया पेंशन दे के घोषणा करे रिहिसे, जेला बिन्नी बाई ह ‘मैं नून चटनी म बासी खा लेहूं फेर सरकार के कोनो सहायता ल नइ झोंकंव’ कहे रिहिसे.

बिन्नी बाई सोनकर के अइसने जनकल्याण के कारज मनला देखत रायपुर नगर निगम डहार ले 1998 म उनला “नगरमाता” के उपाधि ले सम्मानित करे गे रिहिसे. छत्तीसगढ़ शासन के समाजसेवा के क्षेत्र म दिए जाने वाला प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘मिनी माता सम्मान’ ले घलो बिन्नी बाई सोनकर ल सम्मानित करे गे रिहिसे. 20 अगस्त 2004 के ए दया अउ करुणा के देवी ह अपन नश्वर देंह ल छोड़ के परमधाम के रद्दा धर लिए रिहिसे.

इहाँ ए जानना जरूरी हे, तब अभी के डाॅ. अंबेडकर अस्पताल के तब नांव नइ धरा पाए रिहिसे, तब हमन वो अस्पताल के नांव ल बिन्नी बाई के नांव म करे खातिर मांग करे रेहेन. फेर इहाँ राष्ट्रीयता के नांव म क्षेत्रीय उपेक्षा के जेन खेल चलत हे, तेन ह पहिली घलो चारों मुड़ा दिखय. आखिर हमर समिति के प्रयास ले भांठागांव के हाई स्कूल के नांव ल ” नगरमाता बिन्नी बाई सोनकर शा. उ. मा. विद्यालय ” करे गिस. मैं बिन्नी बाई ले बहुतेच प्रभावित रेहेंव, तेकर सेती उंकरे संदर्भ म कुछ कल्पना के सहारा लेवत एक कहानी घलो लिखे रेहेंव- ‘धरमिन दाई’ ए कहानी ह मोर संकलन ‘ढेंकी’ म संकलित हे.
आज बिदागरी तिथि के बेरा म उंकर सुरता ल पैलगी जोहार…

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