बस्तर के पहाड़ी अंचल में डिजिटल क्रांति के नवा अंजोर – संतोष कुमार ह बदल दीस कोलेंग के सूरत
रायपुर. कभू बस्तर के नाम सुनत ही मन में सिरिफ घना जंगल अऊ माओवाद के डर समा जाय राहय। बस्तर जिला के दरभा ब्लॉक के कोलेंग गांव घलो एक अइसने इलाका राहय, जिहां विकास के किरण ह नक्सली साया अऊ बिहड़ रद्दा के सेती पहुंचे बर डर्राय । फेर आज तस्वीर बदल गे हे। कभू जऊन इलाका म गोली के आवाज गूंजय, आज ओकर जगह कंप्यूटर के की-बोर्ड के टिक-टिक अऊ डिजिटल लेनदेन के आवाज सुनाई देवत हे।
ए बदलाव के कहानी गांव के ही एक पढ़े-लिखे जवान संतोष कुमार के आय। हायर सेकेंडरी तक पढ़े के बाद संतोष ह सहर डाहर जाय के बदला अपन ही गांव बर कुछ करे के फइसला करिस। पाछू तीन बछर ले ओ ह ग्राम पंचायत कॉम्प्लेक्स में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) चलावत हे। जऊन इलाका में कभू नेटवर्क के समस्या राहय, उहां संतोष ह अपन मेहनत ले गांव वाले मन ल सब्बो सुविधा देवत हे।
संतोष के सेती आज कोलेंग के साथे-साथ चांदामेटा, मुण्डागांव, छिंदगुर, कांदानार, सरगीपाल, काचीरास जइसन गांव के लोगन मन ल:
- पइसा निकाले।
- बैंक खाता खोले।
- आयुष्मान कार्ड बनवाए।
ए सब्बो काम बर अब दरभा या जगदलपुर जाय के जरूरत नहीं पड़य।
संतोष के सेवा सिरिफ बैंकिंग तक ही सीमित नइ हे, ओ ह ई-श्रम कार्ड, किसान पंजीयन अऊ पैन कार्ड जइसन जरूरी कागजात घलो गांव में ही बनावत हे। सबले बड़े बात ये हे कि पाछू बछर आधार पंजीयन के परीक्षा पास करे के बाद ओ ह गांव में ही आधार कार्ड बनाय के काम सुरू कर दीस हे, जऊन ह ए दुर्गम इलाका बर कोनो बरदान ले कम नोहे। अब इहां के लोगन मन ल जाति, आय अऊ निवास प्रमाण पत्र बर कोसों दूरिहा नइ भटके बर पड़य, जेकर ले ओमन के पइसा अऊ समय दूनों बाचत हे।
नक्सलवाद के डर अऊ नेटवर्क के दिक्कत मन ल हराके संतोष ह साबित कर दीस कि अगर इरादा मजबूत हे, त विकास ल आखरी आदमी तक पहुंचाय जा सकथे। ए काम ले ओ ह खुदे हर महिना लगभग 15 हजार रुपया कमावत हे अऊ आत्मनिर्भर बने हे। संतोष के ए कोसिस ह बस्तर के जवान मन के ओ भरोसा के प्रतीक आय, जऊन ह अब दहशत ल छोड़ के अपन भविष्य संवारे बर जाग गे हे। आज कोलेंग में डिजिटल लेनदेन के सुगमता, बदलते बस्तर अऊ मजबूत होत ग्रामीण भारत के एक बढ़िया तस्वीर आय।