बिहान योजना से जुड़ीं जीपीएम की 59 हजार से अधिक महिलाएं, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
5,576 स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को मिल रहे आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर, चालू वित्तीय वर्ष में 676 नए समूह गठित
रायपुर, छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। योजना के माध्यम से महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर बचत, बैंकिंग, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों की ओर कदम बढ़ा रही हैं। जिले में 13 अक्टूबर 2026 तक 5,576 स्व-सहायता समूहों से 59,524 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। यह पहल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
5,576 समूहों से जुड़ीं 59,524 महिलाएं
बिहान मिशन के तहत जिले के तीनों विकासखंडों में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार, गौरेला में 1,828 समूहों से 19,654 महिलाएं, पेंड्रा में 1,603 समूहों से 17,612 महिलाएं और मरवाही में 2,145 समूहों से 22,258 महिलाएं जुड़ी हैं। समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से बचत करने, आर्थिक जरूरतों पर चर्चा करने और आजीविका से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है।
चालू वित्तीय वर्ष में 676 नए समूहों का गठन
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक जिले में 676 नए स्व-सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 12,029 महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें गौरेला विकासखंड में 211 समूहों के माध्यम से 4,189 महिलाएं, पेंड्रा में 130 समूहों से 3,302 महिलाएं और मरवाही में 335 समूहों से 4,538 महिलाएं शामिल हुई हैं। नए समूहों के गठन से ग्रामीण महिलाओं को संगठित करने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों को विस्तार मिला है।
बचत और बैंकिंग से आर्थिक मजबूती
बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह महिलाओं में नियमित बचत की आदत विकसित करने और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं। समूहों के जरिए महिलाएं बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय प्रबंधन और उपलब्ध ऋण सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। इससे उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतों की बेहतर योजना बनाने और स्वरोजगार के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने से परिवार की आय में योगदान देने और घरेलू निर्णयों में अपनी भूमिका मजबूत करने के अवसर भी बढ़ते हैं।
खेती, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों से स्वरोजगार की संभावनाएं
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित गतिविधियों, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों के निर्माण एवं विपणन जैसे क्षेत्रों में आजीविका की संभावनाएं मौजूद हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि, स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के अनुसार आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं। कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच मिलने से इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सामूहिक प्रयासों से संसाधनों का बेहतर उपयोग और उत्पादों के विपणन के नए अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ बढ़ रही सामाजिक भागीदारी
स्व-सहायता समूह महिलाओं को सामूहिक निर्णय लेने, अपने विचार साझा करने और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर देते हैं। समूहों में नियमित संवाद और आपसी सहयोग से नेतृत्व क्षमता तथा आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिलती है। महिलाओं का संगठित होना उन्हें आर्थिक चुनौतियों से निपटने और आजीविका के अवसर तलाशने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराता है। इस तरह बिहान योजना आर्थिक गतिविधियों के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित करने का माध्यम बन रही है।
जीपीएम जिले में 59,524 महिलाओं का स्व-सहायता समूहों से जुड़ना ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में व्यापक भागीदारी को दर्शाता है। समूहों को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और बाजार से जोड़ने के प्रयास महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बिहान योजना के माध्यम से संगठित महिलाएं बचत, सामूहिक सहयोग और आजीविका गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।