7वें निर्मल पाण्डेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल में प्रतिभा चौहान का जलवा: ‘काली तुलसी’ के लिए मिला बेस्ट एक्ट्रेस (रनर अप) का खिताब
सिनेमा की दुनिया में सफलता वही हासिल करते हैं जो पर्दे के पीछे की मुश्किलों से हार नहीं मानते। ऐसी ही मिसाल पेश की है उभरती हुई अभिनेत्री प्रतिभा चौहान ने। हाल ही में आयोजित प्रतिष्ठित ‘7वें निर्मल पाण्डेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल 2026’ में प्रतिभा चौहान ने अपनी सशक्त अदाकारी से हर किसी को प्रभावित किया। उन्हें उनकी चर्चित शॉर्ट फिल्म ‘काली तुलसी’ के लिए ‘बेस्ट एक्ट्रेस शार्ट फिल्म (रनर अप)’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
बीमारी से जूझते हुए भी नहीं मानी हार
यह पुरस्कार प्रतिभा के लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस और अभिनय के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है। फिल्म की शूटिंग के दौरान वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं हटाए।
अपनी इस उपलब्धि और संघर्ष को याद करते हुए प्रतिभा चौहान ने कहा:
“उस वक़्त मेरी तबीयत बहुत ख़राब थी। शरीर में बहुत ज़्यादा सूजन थी जो फिल्म के दृश्यों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगी। उस शारीरिक कष्ट के बावजूद मैंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी। आज जब इस मेहनत के लिए अवार्ड मिला है, तो लगता है कि मेरा सारा संघर्ष सफल हो गया।”
दिग्गज कलाकारों संग स्क्रीन साझा करने का अनुभव
शॉर्ट फिल्म ‘काली तुलसी’ अपनी बेहतरीन कहानी और उम्दा अभिनय के लिए सराही जा रही है। इस फिल्म का कुशल निर्देशन अरुण जॉनसन (Arun Johnson) ने किया है, जबकि इसके निर्माता अविनाश शरण (Avinash Sharan) हैं।
फिल्म में प्रतिभा को इंडस्ट्री के कई अनुभवी और जाने-माने कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला:
- योगेश अग्रवाल
- धर्मेंद्र चौबे
- सरला सेन
- विक्रम सेंद्रे
- शौर्य ज्योति
इन दिग्गज कलाकारों के बीच अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाना प्रतिभा के लिए एक बड़ी उपलब्धि और सीखने का शानदार अनुभव रहा।
पहली बार गंभीर किरदार में छोड़ी अपनी छाप
जहाँ ज्यादातर युवा कलाकार शुरुआती दौर में हल्के-फुल्के या रोमांटिक किरदार चुनते हैं, वहीं प्रतिभा चौहान ने ‘काली तुलसी’ में एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई।
खराब सेहत के बावजूद एक जटिल किरदार की बारीकियों को पर्दे पर पूरी शिद्दत से जीवंत करने के लिए उन्हें क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों से भरपूर सराहना मिल रही है। निर्मल पाण्डेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल में उनकी यह जीत यह साबित करती है कि सच्ची लगन और जुनून के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।