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खबर छत्तीसगढ़

 विशेष लेख : श्रम का सम्मान, मजदूरों का कल्याण

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June 14, 2026 3 Mins Read
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दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर कल्याण योजना से आया खुशहाली का नया सवेरा

  • विष्णु प्रसाद वर्मा , सहायक संचालक 

रायपुर,  दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है। कृषि पर निर्भर उन भूमिहीन परिवारों को आर्थिक संबल और सुरक्षा प्रदान करना, जिनके पास कोई कृषि योग्य भूमि नहीं है। इसके तहत राज्य के भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को प्रति वर्ष 10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

            दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर कल्याण योजना एक ऐसी दूरदर्शी योजना है, जो सीधे उन हाथों को मजबूत कर रही है जो खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर देश के अन्न भंडार भरते हैं। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन परिवारों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और स्वाभिमान लाने की एक अनूठी पहल है।
 
अनिश्चितता से सुरक्षा की ओर

             हमारे ग्रामीण कृषि मजदूरों के पास जब अपनी जमीन नहीं होती, तो उनकी आजीविका पूरी तरह से मौसम, फसलों के चक्र और दैनिक मजदूरी पर निर्भर हो जाती है। विशेषकर जब खेतों में काम नहीं होता (ऑफ-सीजन), तब इन परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। इसी अनिश्चितता को दूर करने और उनके परिवारों की शुद्ध वार्षिक आय में वृद्धि करके उन्हें एक मजबूत सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा कवच देने के उद्देश्य से, सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-2025 में इस कल्याणकारी योजना की शुरुआत की गई है।

क्यो खास है यह योजना ?

               इस योजना का खाका ग्रामीण समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखकर खींचा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध वार्षिक आय को बढ़ाते हुए उनकी आय में सीधी वृद्धि करना है, ताकि खेती के संकट के दिनों में उन्हें एक निश्चित वित्तीय आधार मिल सके। इस आर्थिक सहायता के जरिए मजदूरों को स्थानीय साहूकारों के महंगे कर्ज के जाल से बचाकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। यह योजना केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर उतरकर लोगों की जिंदगी बदल रही है और इसके आंकड़े इसकी शानदार सफलता की गवाही देते हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक चिन्हित पात्र परिवार को हर साल 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे पूरी पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों या दलालों की भूमिका खत्म हो जाती है।

वर्ष 2026 में 4 लाख 95 हजार 965 हितग्राही लाभान्वित, 22 हजार 28 बैगा-गुनिया परिवार भी शामिल

               योजना के क्रियान्वयन के पहले वर्ष 2025 में कुल 5 लाख 62 हज़ार 112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के मान से कुल 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में अंतरित की गई थी। सफलता के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष 2026 में 4 लाख 95 हजार 965 हितग्राहियों को 10 हजार रुपये के मान से कुल 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खातों में अंतरित की जा रही है, जिसमें विशेष रूप से 22 हजार 28 बैगा-गुनिया परिवार भी शामिल हैं। वर्तमान में आगामी किस्तों को बिना किसी तकनीकी रुकावट के भेजने के लिए वर्ष 2025-26 के पात्र हितग्राहियों का भौतिक सत्यापन एवं e-KYC  (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।

              इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक परिवार का मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना, पूरी तरह से भूमिहीन होना अर्थात नाम पर कोई कृषि भूमि दर्ज न हो और आजीविका का मुख्य साधन अनिवार्य रूप से कृषि मजदूरी होना आवश्यक है। इसके लिए ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत पंचायत, जनपद या विकासखंड (ब्लॉक) कार्यालय से निर्धारित फॉर्म प्राप्त कर, उसे सही-सही भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम पंचायत के सचिव या ग्राम रोजगार सहायक के पास जमा किया जा सकता है। वहीं ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए हितग्राही योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से या अपने नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन के साथ परिवार के सदस्यों का पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड), डीबीटी इनेबल्ड बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, लिंक मोबाइल नंबर, ग्राम पंचायत द्वारा जारी निवास/मजदूर होने का सत्यापन पत्र और राजस्व विभाग (पटवारी) द्वारा जारी भूमिहीन होने का प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

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