विशेष लेख: अबूझमाड़ के मेधा ह गढ़ दिस नवा ‘नारायणपुर’: पढ़ाई के शिखर म वनांचल के गौरवगाथा
- विष्णु वर्मा सहायक संचालक
रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सा म जेला कभे दुर्गम अउ ‘अबूझ’ माने जावत रहिस, आज ओही नारायणपुर ह अपन बुद्धि के लोहा पूरा परदेस म मनवा लिस हे। साल 2026 के बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट ह ये बता दिस कि बस्तर के घना जंगल अउ अबूझमाड़ के वादी म अब सिरिफ संघर्ष के गूँज नई, बल्कि सफलता के संखनाद सुनाथे। कक्षा 10वीं म पूरा छत्तीसगढ़ म दूसरा स्थान पाना नारायणपुर बर सिरिफ एक आंकड़ा नोहे, बल्कि ये एक ऐतिहासिक शैक्षणिक क्रांति आय।
नारायणपुर के उदय, छत्तीसगढ़ के मान
जिला के ए अभूतपूर्व सफलता ऊपर खुशी जतावत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ह लइका मन अउ जिला प्रसासन के बड़ बखान (सराहना) करिन। ओ मन अपन संदेस म कहिन कि— “नारायणपुर के लइका मन आज जेन कर के देखाय हें, ओ ह पूरा छत्तीसगढ़ बर गरब के बात आय। अबूझमाड़ के माटी ले निकल के परदेस के मेरिट सूची म जगह बनाना ये साबित करथे कि हमर सरकार के ‘शिक्षा-पहुँच’ नीति सफल होवत हे। नारायणपुर अब सिरिफ अपन संस्कृति बर नई, बल्कि अपन मेधा बर घलो जाने जाही। ए नान्हे लइका मन ह नक्सलवाद अउ पिछड़ापन के अंधियार ल पढ़ाई के अंजोर ले हरा दीन।”
दसवां ले दूसरा पायदान तक एक अचंभित छलांग
इतिहास गवाह हे कि विकास के पहिली सीढ़ी पढ़ाई-लिखाई होथे। पिछला एक साल म नारायणपुर म जेन बदलाव दिखे हे, ओ ह कउनो चमत्कार ले कम नई हे। बछर 2025 म 84.96% के संग 10वें स्थान म रहने वाला ये जिला, सिरिफ एक साल म 94.80% सफलता दर के संग सीधे परदेस म दूसरा स्थान म पहुँच गे। ओही च, 12वीं के रिजल्ट म घलो जिला ह अपन रैंकिंग म 7 अंक के सुग्घर सुधार करत 12वां स्थान हासिल करिस हे।
रणनीति अइसन कि बदल गे तस्वीर
ए सफलता के कहानी ओ सरकारी स्कूल के कमरा म लिखे गे, जिहां जिला प्रसासन अउ शिक्षा विभाग ह मिलके ‘मिशन मोड’ म काम करिन। कलेक्टर के मार्गदर्शन म बोर्ड परीक्षा देवइया बर विशेष कार्ययोजना तइयार करे गिस। मॉडल टेस्ट, प्री-बोर्ड परीक्षा अउ ‘रिमेडियल क्लास’ के जरिया कमजोर लइका मन ल आगू लाय गिस। गुरुजी के लगन अउ प्रसासन के लगातार देख-रेख ह वनांचल के लइका मन के भीतर ले ‘परीक्षा के डर’ ल निकाल के ‘जीत के उत्साह’ म बदल दिस।
विकास के नवा पैमाना, अबूझमाड़ ले मुख्यधारा तक
जब हमन बुनियादी ढांचा के गोठ करथन, त अक्सर सड़क मन ल गनथन। पर नारायणपुर ह ये बता दिस कि असली विकास ‘मानव पूंजी’ (मनखे) के विकास आय। दूर-दराज के वनांचल इलाका म लइका मन ल स्कूल बुलाय बर विशेष अभियान चलाके अउ समय म कोर्स पूरा करके प्रसासन ह एक अइसन माहौल बनाइस, जिहां पढ़ाई एक तिहार बन गे।
अबूझमाड़ के लइका मन अब सिरिफ जंगल बचाए तक सीमित नई हें, बल्कि ओ मन डॉक्टर, इंजीनियर अउ बड़े अधिकारी बने के दौड़ म परदेस के दूसर विकसित जिला के संग कंधा ले कंधा मिलाके खड़े हें।
एक उज्जर भविष्य के सुरूआत
महतारी-बाप के संग लगातार गोठ-बात अउ गुरुजी के अटूट मेहनत ही ए ऐतिहासिक सफलता के मूल मंत्र आय। नारायणपुर के ये उपलब्धि पूरा परदेस बर एक संदेस हे—कि साधन के कमी कभे हुनर के रस्ता नई रोक सके, बस संकल्प विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ जइसन मजबूत होना चाही। आज ‘अबूझ’ अब ‘बूझ’ म बदल चुके हे अउ पढ़ाई के ये दिया अब बुझने वाला नई हे।