बिहान से मिली उड़ान, खेती ने बदली हेमलता की जिंदगी
60 हजार के ऋण से शुरू किया खेती और सब्जी उत्पादन का विस्तार, अब सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय
रायपुर, कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम डोमाडीह (अ) की हेमलता पटेल आज खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं। खेतों में मेहनत, सब्जी उत्पादन और स्थानीय बाजार तक अपनी उपज पहुंचाकर उन्होंने न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह भी बनाई है।
हेमलता हमेशा से चाहती थीं कि परिवार की आमदनी बढ़े और वे खुद भी आर्थिक रूप से मजबूत बनें। लेकिन सीमित संसाधनों के कारण उनके सामने कई चुनौतियां थीं। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ना उनके लिए बदलाव की शुरुआत बना। गांव के ‘खुशी स्व सहायता समूह’ का हिस्सा बनने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिली।
समूह और क्लस्टर से मिले सहयोग के बाद हेमलता ने 60 हजार रुपये का ऋण लिया और इसे पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन बढ़ाने में लगाया। उन्होंने खेती के तौर-तरीकों में सुधार किया और खेत में तैयार ताजी सब्जियों को स्थानीय बाजारों तक पहुंचाना शुरू किया।
मेहनत का असर धीरे-धीरे नजर आने लगा। सब्जियों की मांग बढ़ी तो मुख्य दिनों में उनका दैनिक कारोबार 3 से 4 हजार रुपये तक पहुंचने लगा। आज खेती और सब्जी उत्पादन से हेमलता सालाना करीब 2 लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं।
आर्थिक स्थिति बेहतर होने का असर परिवार पर भी पड़ा है। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर उनकी चिंता कम हुई है। अब वे परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। ‘बिहान’ और स्व सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें गृहिणी से महिला कृषक-उद्यमी के रूप में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
हेमलता की कहानी बताती है कि ग्रामीण महिलाओं को अगर सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले, तो वे अपनी मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई राह भी बना सकती हैं।