नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए पाठ्यपुस्तक निगम प्रतिबद्ध
रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण से संबंधित सभी निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), एनसीईआरटी मानकों तथा राज्य शासन और एससीईआरटी के निर्देशों के अनुरूप लिए गए हैं।
निगम के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम पर तैयार की जा रही हैं। एनसीईआरटी, नई दिल्ली एवं एससीईआरटी, रायपुर के मध्य 15 अक्टूबर 2025 को हुए अनुबंध के तहत आंतरिक पृष्ठों के लिए 80 जीएसएम टेक्स्ट पेपर तथा आवरण के लिए 220 जीएसएम कवर पेपर का उपयोग अनिवार्य है। वहीं कक्षा 9 एवं 10 की पुस्तकों के लिए 70 जीएसएम कागज का उपयोग किया जा रहा है। यह निर्णय अनुबंधीय प्रावधानों और शैक्षणिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है।
निगम ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 1 से 8 तक विषयों की संख्या बढ़ाई गई है। पूर्व में जहाँ 134 विषयों की पुस्तकें मुद्रित होती थीं, वहीं शिक्षा सत्र 2026-27 में 144 विषयों की पुस्तकों का मुद्रण प्रस्तावित है। कक्षा 4 और कक्षा 7 में विषय वृद्धि का निर्णय शासन एवं एससीईआरटी स्तर पर लिया गया है। विषयों की संख्या बढ़ने से कागज की आवश्यकता में वृद्धि स्वाभाविक है, जिसे नियोजित और अनुमोदित प्रक्रिया के तहत पूरा किया जा रहा है।
निगम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा सत्र 2025-26 में लगभग 2 करोड़ 65 लाख पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण के लिए कुल लगभग 11,000 मीट्रिक टन कागज का उपयोग किया गया था। इसी आधार पर शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए भी लगभग इतनी ही मात्रा में 70 एवं 80 जीएसएम कागज के क्रय की प्रक्रिया निविदा के माध्यम से की जा रही है। इसलिए कागज की असामान्य वृद्धि से जुड़े आकलन तथ्यहीन हैं।
छात्रों के बस्ते का वजन 14 प्रतिशत बढ़ने के दावों को खारिज करते हुए निगम ने कहा कि केवल कागज के जीएसएम में बदलाव के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना भ्रामक है। बस्ते का वजन मुख्य रूप से विषयों की संख्या, पुस्तकों के पृष्ठों और पाठ्यक्रम संरचना पर निर्भर करता है। साथ ही डिजिटल शिक्षण सामग्री, चरणबद्ध वितरण प्रणाली और अन्य शैक्षणिक उपायों के माध्यम से बस्ते के वजन को नियंत्रित रखा जा रहा है।
निगम ने यह भी बताया कि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निविदा प्रक्रिया में कठोर शर्तें लागू की गई हैं। निविदाकर्ताओं से कागज मिलों के लिए जीएसटी विभाग द्वारा जारी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट तथा न्यूनतम 42,000 मीट्रिक टन प्रिंटिंग पेपर आपूर्ति का अनुभव अनिवार्य किया गया है, ताकि केवल सक्षम और अनुभवी कंपनियाँ ही आपूर्ति में शामिल हों।
निगम ने दोहराया कि पाठ्यक्रम, विषय संरचना और शैक्षणिक निर्णय एससीईआरटी एवं राज्य शासन द्वारा लिए जाते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम स्वीकृत पुस्तकों के मुद्रण एवं वितरण की जिम्मेदारी निभाता है। कागज, वजन और व्यय को लेकर किए जा रहे अतिरंजित दावे वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रमित करने वाली जानकारी पर विश्वास न करें और आधिकारिक तथ्यों पर ही भरोसा करें। निगम ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं और नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और पठनीय पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है।