सुदृढ़ कृषि व्यवस्था और पारदर्शी सुशासन से बदल रहा छत्तीसगढ़ के किसानों की तकदीर’
रायपुर, देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का कृषि क्षेत्र एक नई पहचान के साथ उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में खेती-किसानी को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-आधारित और किसान-केंद्रित बनाने का एक व्यापक अभियान चलाया है।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के निर्देशन में विभाग ने गुणवत्ता नियंत्रण, निर्बाध खाद-बीज आपूर्ति और पारदर्शी वितरण का एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।
छत्तीसगढ़ कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां
| योजना / क्षेत्र | लक्ष्य / स्थिति | हासिल उपलब्धि / विवरण |
| खरीफ 2026 बोनी | 48.69 लाख हेक्टेयर लक्ष्य | 45.62 लाख हेक्टेयर (लगभग 94%) बोनी पूर्ण |
| उर्वरक भंडारण | 15.55 लाख मीट्रिक टन | 15.83 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड भंडारण |
| 품질 गुणवत्ता नियंत्रण (2025 vs 2026) | प्रवर्तन कार्रवाई | 11.20 गुना वृद्धि (44 से बढ़कर 493 मामले) |
| कृषक उन्नति योजना | खरीफ 2023 से 2025 | ₹35,892.90 करोड़ का सीधे DBT ट्रांसफर |
| मत्स्य उत्पादन | देश के अग्रणी राज्यों में | 23% की वृद्धि के साथ 9.59 लाख टन उत्पादन |
| कृषि अवसंरचना निधि (AIF) | ₹1,900 करोड़ लक्ष्य | ₹3,026 करोड़ की ऐतिहासिक उपलब्धि |
1. अमानक खाद-बीज पर ‘जीरो टॉलरेंस’: 11.20 गुना बढ़ी कार्रवाई
कृषि क्षेत्र में राज्य की सबसे बड़ी उपलब्धि नकली और अमानक उर्वरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई रही है। विभाग की शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) नीति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में कानूनी कार्रवाइयों में 11.20 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
- न्यायालयीन प्रकरण: 4 से बढ़कर 65 हुए।
- जब्ती की कार्रवाई: 2 से बढ़कर 107 पहुंची।
- लाइसेंस निलंबन व निरस्तीकरण: 106 लाइसेंस निलंबित और 15 निरस्त किए गए।
- बिक्री पर प्रतिबंध: 189 मामलों में विक्रय प्रतिबंध लगाया गया।
- FIR दर्ज: अमानक खाद-बीज बेचने वालों के खिलाफ पहली बार 11 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं।
2. खरीफ 2026: खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता और 94% बोनी पूरी
किसानों को समय पर प्रामाणिक कृषि आदान उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
- प्रदेश में 11 अगस्त तक 45.62 लाख हेक्टेयर (94%) क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है।
- किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं।
- रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में विभाग द्वारा तरल नैनो यूरिया (Liquid Nano Urea) के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
“किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सुगमता से खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए। कालाबाजारी, जमाखोरी और गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
3. कृषक उन्नति योजना और डिजिटल क्रांति: DBT से सीधे खाते में राशि
सरकार की किसान-हितैषी नीतियों ने कृषकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है:
- कृषक उन्नति योजना: खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ₹35,892.90 करोड़ दिए गए।
- PM-किसान सम्मान निधि: 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में ₹493 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई।
- डिजिटल सेवाएं: एग्रीस्टैक (AgriStack), ई-केवाईसी (e-KYC) और ऑनलाइन प्रमाणीकरण से योजनाओं में पारदर्शिता आई है। रायपुर स्थित शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला को NABL मान्यता मिलना राज्य की वैज्ञानिक सोच का प्रमाण है।
4. आधुनिक यंत्रीकरण, ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक खेती
कृषि को आधुनिक और लागत-प्रभावी बनाने के लिए राज्य में बहुआयामी प्रयास किए गए हैं:
- कृषि यंत्र एवं बैंक: 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र दिए गए तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए।
- सूक्ष्म सिंचाई: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 41,967 हेक्टेयर में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिस्टम का विस्तार हुआ।
- प्राकृतिक खेती: पर्यावरण संरक्षण और लागत घटाने के उद्देश्य से 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।
5. उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन का अभूतपूर्व विकास
- उद्यानिकी एवं ऑयल पाम: उद्यानिकी फसलों का दायरा बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। हाईटेक नर्सरी, पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज तेजी से तैयार किए जा रहे हैं।
- मत्स्य उत्पादन: मत्स्य उत्पादन 23% बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।
- ई-नाम (e-NAM): प्रदेश की 21 मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ चुकी हैं, जिससे किसानों को उपज का सही मूल्य मिल रहा है।
निष्कर्ष
स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर छत्तीसगढ़ का कृषि परिदृश्य स्पष्ट संकेत देता है कि प्रभावी प्रशासन, दूरदर्शी नीतियों और किसान-केंद्रित योजनाओं के समन्वय से राज्य ‘समृद्ध एवं आत्मनिर्भर कृषि’ की दिशा में देश के सामने एक मिसाल कायम कर रहा है।