धमतरी में ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला’ संपन्न
ट्राइफेड से जुड़कर राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाएंगे 20 स्थानीय शिल्पकार
धमतरी : धमतरी जिले के लाइवलीहुड कॉलेज में एक दिवसीय ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला’ सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन धमतरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मेले का मुख्य उद्देश्य स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों और उद्यमियों के पारंपरिक हुनर को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।
20 कारीगरों ने लगाए स्टॉल, ट्राइफेड नेटवर्क से जुड़ने का मौका
मेले में जिले के 20 जनजातीय कलाकारों और कारीगरों ने अपने उत्कृष्ट उत्पादों के स्टॉल लगाए। इस दौरान पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क में सूचीबद्ध होने का सीधा अवसर प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी व्यापक पहचान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का प्रभावी मंच प्रदान करेगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों तथा मेलों में भाग लेने का मौका मिलेगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए स्रोत मिलेंगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर विशेष बल
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका गतिविधियां केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। उन्होंने कारीगरों और उद्यमियों को निम्नलिखित सुझाव दिए:
- डिजिटल मार्केटिंग: आज इंटरनेट का दौर है, इसलिए अपने उत्पादों को सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाएं और सीधे ग्राहकों से जुड़ें।
- प्रोसेसिंग एवं ब्रांडिंग: जिले में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध वन उपज (जैसे सतावर, लाख, इमली) का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान दें।
- विशेष प्रशिक्षण: कारीगरों का एक विशेष बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उत्पाद प्रस्तुतीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- सरकारी योजनाएं: युवाओं को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और उद्योग विभाग की योजनाओं से जुड़कर लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
पारंपरिक कला को मिलेगा नया आयाम
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी समृद्ध संस्कृति और शिल्प शैली है