अटल इच्छाशक्ति अउ सही रद्दा ले अंधियार ले अंजोर कोती—अरविंद हेमला के हिम्मत अउ बदलाव के कहानी
रायपुर. अंधियार रद्दा ले लौट के अंजोर तक के सफर ह निरासा, संघर्ष अउ दुख-तकलीफ ले निकल के आसा, सफलता अउ गियान कोती जाय के चिनहा आय। ये एक अइसन यात्रा आय जेला अटल इच्छाशक्ति अउ सही मार्गदर्शन ले पूरा करे जा सकथे। 22 बछर के अरविंद हेमला के जिनगी संघर्ष ले भरे रिहिस हे। बीजापुर जिला के एक साधारण गांव के परिवार मा जनमे अरविंद ह लइकापन ले ही गरीबी, अनपढ़ता अउ सामाजिक चुनौती मन ले जूझत रिहिस। परिवार के गुजारा खेती-मजदूरी ऊपर निर्भर रिहिस, जेकर ले रोज के जरूरत पूरा करना घलो मुस्किल हो जावत रिहिस।
कम उमर मा ही महतारी-बाप के साया सिर ले उठ जाना ओकर जिनगी के सबले बड़े आघात रिहिस, पिता के निधन 2009 मा अउ माता के 2016 मा हो गे। ए घटना ह अरविंद ला पूरी तरह ले अकेला अउ असहाय बना दीस। जवान होवत बेरा गलत संगति, इलाका के परिस्थिति अउ आर्थिक मजबूरी के सेती अरविंद ह नक्सली गतिविधि कोती खिंचाय लगिस। धीरे-धीरे ओहा ए रद्दा मा फंस गे, जेकर ले ओकर सामाजिक अउ पारिवारिक जिनगी पूरी तरह प्रभावित हो गे। फेर समय के संग अरविंद ला अहसास होइस कि ये रद्दा ओला सिरिफ़ डर अउ अनिश्चित भविष्य कोती ले जावत हे। ओहा अपन जिनगी ला बदले के दृढ़ संकल्प लीस। सासन के आत्मसमर्पण अउ पुनर्वास नीति ले प्रेरित हो के ओहा मार्च 2025 मा अपन मर्जी ले आत्मसमर्पण कर दीस।
आत्मसमर्पण के बाद सासन डहर ले ओला पुनर्वास केंद्र बीजापुर मा जरूरी मार्गदर्शन, सहयोग अउ कौशल विकास के ट्रेनिंग दिए गिस। राज मिस्त्री काम के ट्रेनिंग पा के ओहा निर्माण काम मा तकनीकी निपुणता हासिल करिस। आज अरविंद तेलंगाना राज्य के मंचेरियल जिला मा एक निर्माण मजदूर के रूप मा काम करत हे अउ रोज के 600 रूपया मजदूरी कमा के मान-सनमान के जिनगी जियत हे। अपन मेहनत अउ लगन ले ओहा न केवल आत्मनिर्भर बने हे, बल्कि समाज के मुख्यधारा मा घलो सफलतापूर्वक वापसी करे हे।
राज्य सरकार के पुनर्वास नीति के लक्ष्य हिंसा के रद्दा छोड़इया नक्सली मन ला मुख्यधारा मा लाना अउ समाज के संग फिर ले जोड़ना हे। ये कहानी हमन ला सिखाथे कि परिस्थिति कतको कठिन काबर झन होवय, सही फैसला, अटल इच्छाशक्ति अउ लगातार कोसिस ले जिनगी ला नवा दिसा दिए जा सकथे।