वंचित परिवार के कष्ट भरे जीवन में सपनों की हकीकत बनकर आया प्रधानमंत्री आवास
रायपुर. प्रत्येक जनहितकारी योजना का लाभ यदि वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचता है तो उसका एक अलग ही परिणाम देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना का दायरा उन तमाम वंचित परिवारों को राहत की छांव देने का माध्यम बन रहा है, जिनके सपनों में भी पक्के छत का आसरा नहीं था। कोरिया जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत भांड़ी में रहने वाले ऐसे ही एक वंचित परिवार के लिए उनका पक्का आवास का सपना हकीकत में बदल चुका है।
मेहनतकश जीवन का संघर्ष
कोरिया के जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भांडी में रहने वाली जलकी रानी अपने पति दुलार साय और दो बच्चों यानी कुल चार बच्चों के साथ एक कच्चे मकान में जीवन यापन कर रही थीं। मिट्टी की दीवारें, बारिश के दौरान टपकती खपरैल और हर बिगड़ते मौसम में बच्चों की सुरक्षा की चिंता यही उनकी रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी थी। बरसात में घर के भीतर पानी भर जाता, गर्मी में तपती छत और सर्दी में ठंडी हवाएँ दैनिक जीवन संघर्ष में परिवार की परेशानियाँ और बढ़ा देती थीं।
आर्थिक संकट में सपनों की छत
जलकी रानी के वंचित परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मनरेगा जैसी योजना के माध्यम से उन्हे सौ दिवस के रोजगार के बाद अन्य किसानों के खेतों में मजदूरी कर किसी तरह अपने बच्चों का पालन-पोषण करते थे। मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय और परिवार में बच्चों की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच इस दंपत्ति का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण होने से उनके लिए पक्के मकान का सपना केवल सपने जैसा ही था।
प्रधानमंत्री आवास से बदली जिंदगी
इस परिवार के दैनिक जीवन में आशा की एक नई किरण के रूप में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत उन्हें पक्के घर की स्वीकृति मिली। यह उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं थी। स्वीकृति मिलने के बाद जलकी रानी और दुलार साय ने पूरे मन से घर बनाने का कार्य शुरू किया और मनरेगा में काम करने से नब्बे दिन की मजदूरी राशि को भी अपने घर निर्माण में लगाया। दोनो पति पत्नी के द्वारा आवास बनाने के लिए निर्माण कार्य में हाथ बंटाया और उन्होंने अपने सपनों का घर खड़ा किया।
खुशियों की राह, सपनों की हकीकत
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जलकी रानी के परिवार के लिए वह दिन आया जब कच्चे मकान की जगह एक मजबूत सपनों की हकीकत लिए एक पक्का घर खड़ा है। पक्की छत के नीचे पूरा परिवार सुरक्षित और खुशहाल महसूस कर रहा है अब बच्चों के चेहरे पर मुस्कान है और माता-पिता की आँखों में संतोष का भाव। खुश होकर जलकी रानी कहती हैं कि यह घर केवल उनकी मेहनत और आवास योजना से पूरे हुए सपनों का प्रतीक है।