विश्व धरोहर दिवस म रायपुर म सजी विरासत के अनोखी झलक, संरक्षण म विशेषज्ञ मन के गोठ-बात
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय म चित्र प्रदर्शनी अउ व्याख्यान—सोमनाथ ले छत्तीसगढ़ के मंदिर तक सांस्कृतिक यात्रा, आपदा के बखत म धरोहर जोगाए बर जोर
रायपुर: संस्कृति विभाग के अंतर्गत पुरातत्त्व, अभिलेखागार अउ संग्रहालय संचालनालय, रायपुर कोति ले बिस्व धरोहर दिवस के मउका म महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय म चित्र प्रदर्शनी अउ व्याख्यान कार्यक्रम के आयोजन करे गिस। ए आयोजन संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन अउ पुरातत्व एवं संस्कृति संचालक विवेक आचार्य के निर्देशन म पूरा होइस।
कार्यक्रम के सुरूवात प्रदेश के वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. रमेंद्रनाथ मिश्र, अतिथि वक्ता डॉ. राम सतीश पुसुपुलेटी अउ पवन जोशी मन करिन। ए मउका म भारी संख्या म विद्वान, शोधकर्ता (reasearchers), लइका मन अउ आम जनता मन सामिल होइन।
संचालनालय कोति ले हर बछर बिस्व धरोहर दिवस म ऐतिहासिक स्मारक, सांस्कृतिक जगह अउ परंपरा ला जोगाए बर मनखे मन ला जागरूक करे अउ समाज के भागीदारी बढ़ाए के उद्देश्य ले अलग-अलग कार्यक्रम करे जाथे। ए बछर घलो प्रदर्शनी अउ व्याख्यान के माध्यम ले विरासत ला जोगाए के संदेस दिये गिस।
कार्यक्रम म भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक पहल “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – अटूट आस्था के 1000 वर्ष” के रद्दा म चलत कला वीथिका (Art Gallery) म बिसेस चित्र प्रदर्शनी लगाय गिस। ए प्रदर्शनी म सोमनाथ मंदिर के 19वीं, 20वीं अउ 21वीं सदी के चित्र मन के माध्यम ले ओकर ऐतिहासिक विकास, बनावट म बदलाव अउ सांस्कृतिक महत्व ला देखाय गिस।
एकर साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव मंदिर के बनावट (स्थापत्य कला) ला देखावत चित्र घलो ला मोहत रहीन। हमर इहाँ के धरोहर ला देस भर के संदर्भ ले जोड़े के ए कोसिस देखइया बर बहुत गियान के बात रहीस।
ए बछर बिस्व धरोहर दिवस 2026 के थीम “इमरजेंसी रिस्पॉन्स फॉर लिविंग हेरिटेज इन कॉन्टेक्स्ट ऑफ कॉन्फ्लिक्ट एंड डिजास्टर्स” (आपदा अउ बिपत के बखत म जीवंत धरोहर मन के सुरक्षा) ऊपर व्याख्यान घलो राखय गिस। एमा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. राम सतीश पुसुपुलेटी अउ नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के डिप्टी कमांडेंट पवन जोशी मन अपन सुग्घर विचार रखिन।
विशेषज्ञ मन बताइन कि कइसन हमर पुरखा के बनाय मंदिर-मूरती अउ हमर संस्कृति (मूर्त अउ अमूर्त धरोहर) ऊपर खतरा मंडरावत हे। ओ मन संरक्षण म आवे वाली चुनौती अउ आपदा ले निपटे के उपाय मन ऊपर बिस्तार ले गोठियाइन। ओ मन ए बात म जोर दीन कि धरोहर ला जोगाए बर सरकार के साथ-साथ गांव-सहर के मनखे मन के भागीदारी घलो बहुत जरूरी हे।
ए कार्यक्रम म प्रदेश के बड़े-बड़े मंदिर मन—दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी मंदिर, रतनपुर के महामाया मंदिर, राजिम के राजीवलोचन मंदिर, सहसपुर के शिव अउ बजरंगबली मंदिर अउ खरौद के लक्ष्मणेश्वर मंदिर के ट्रस्ट अउ समिति के पदाधिकारी घलो सामिल होइन।
ए मउका म INTACH रायपुर चैप्टर के संयोजक अरविंद, ए.के. सिंह, श्रीश मिश्र समेत कतको गणमान्य नागरिक मन उपस्थित रहीन। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पी.सी. पारख (उप संचालक) अउ विभागीय अधिकारी मन—डॉ. अरुंधति परिहार, प्रवीन तिर्की, भीरेंद्र धीवर, विक्रांत वैष्णव, डॉ. राजीव मिंज, अमर भरतद्वाज, नूतन एक्का अउ अरुण निर्मलकर के ए आयोजन ला सफल बनाय म बड़े हाथ रहीस।
पूरा कार्यक्रम के सुग्घर संचालन पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह ह करिस।
ए आयोजन ह न केवल सांस्कृतिक विरासत ला जोगाए बर मनखे मन ला जागरूक करे म सफल रहीस, बल्कि आज के जुग म आपदा अउ संकट के बीच हमर धरोहर के सुरक्षा बर सबो झन ला मिल-जुल के कोसिस करे के जरूरत ऊपर घलो जोर दिस।