“पोट्ठ लईका पहल” ले बदली तस्वीर- कुपोषण ऊपर कड़ा प्रहार, बढ़त हे स्वस्थ बचपन कोती कदम
रायपुर. छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ चलइया मुहिम अब बढ़िया नतीजा के साथ एक मजबूत जन-आंदोलन के रूप लेवत दिखत हे। राजनांदगांव जिला में प्रशासन के अगुवाई में महिला अउ बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग अउ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के मिले-जुले कोशिश ले चलत “पोट्ठ लईका पहल” अभियान ह लइका मन के पोषण स्तर में बड़े सुधार करके प्रदेश बर एक प्रेरणादायक मॉडल पेश करे हे।
जून 2025 ले शुरू ए नवा अभियान के मतलब सिरिफ कुपोषण के पहिचान करना नई हे, बल्कि समाज ला जागरूक करके मनखे मन के व्यवहार में बदलाव लाना अउ स्थायी समाधान पक्का करना आय। ए कड़ी में हर बृहस्पतिवार (गुरुवार) के जिला के आंगनबाड़ी केंद्र मन में “पालक चौपाल” के आयोजन करे जावत हे। जिहां दाई-ददा ला तिरंगा भोजन (संतुलित अउ अलग-अलग परकार के अहार), लइका अउ महतारी के पोषण, दूध पिलाय के महत्व (स्तनपान), एनीमिया (खून के कमी) ले बचाव, साफ-सफाई अउ लइका मन के सही देख-रेख जइसन जरूरी बात ला सीधा, सरल अउ स्थानीय बोली-भाखा में समझाए जावत हे। एकर साथे-साथ कुपोषित लइका मन के लगातार जांच, वजन-ऊंचाई के नाप, जरूरी दवाई अउ पोषण के सलाह घलो दिए जावत हे, जेकर ले अभियान के असर सीधा जमीन स्तर में दिखत हे।
अभियान के शुरुआत के बखत जून 2025 में जिला के 0 ले 5 बछर के कुल 55,797 लइका मन के जांच करे गिस, जेमा 731 लइका गंभीर, 443 अति गंभीर अउ मध्यम श्रेणी के कुपोषण ला मिला के कुल 9,751 लइका कुपोषित रहिन। ए हालत प्रशासन अउ विभाग बर एक बड़े चुनौती रहीस, फेर सही रणनीति अउ आपसी तालमेल ले ए चुनौती ला मौका में बदल दिए गिस। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन अउ स्वयं सहायता समूह के सक्रिय भागीदारी अउ दाई-ददा के सोच में आए बदलाव ले अभियान ला मजबूती मिलिस। एखरे नतीजा हे कि मार्च 2026 तक जिला में कुपोषित लइका मन के संख्या घटकर 5,146 रहि गे हे। गंभीर कुपोषित लइका मन के संख्या 731 ले घटके 328 अउ अति गंभीर कुपोषित लइका मन के संख्या 443 ले घटके सिरिफ 128 हो गे हे।
यदि प्रतिशत के हिसाब ले देखे जाय त जून 2025 में जिला में कुपोषण के दर 11.23 प्रतिशत रहीस, जेहा मार्च 2026 तक घटके 7.55 प्रतिशत में आ गे हे। मतलब सिरिफ कुछ महीना में 3.68 प्रतिशत के ठोस कमी आई हे, जेहा कोनो भी पोषण अभियान बर एक बड़े उपलब्धि आय। ए सफलता के पाछू सिरिफ योजना के लागू करना नई हे, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन अउ स्वास्थ्य विभाग के टीम के मेहनत अउ नियमित फॉलोअप के बड़े हाथ हे।
“पोट्ठ लईका पहल” आज सिरिफ एक सरकारी कार्यक्रम नई हे, बल्कि समाज के मदद ले चलइया एक सशक्त जन-आंदोलन बन चुके हे। ए पहल ले साफ दिखत हे कि यदि संवेदनशीलता अउ जनभागीदारी ले काम करे जाए, त कुपोषण जइसन कठिन समस्या ऊपर घलो जीत पाए जा सकत हे। छत्तीसगढ़ सरकार के मार्गदर्शन में ए पहल ह राज्य ला कुपोषण मुक्त बनाए कोती तेजी ले आगू बढ़ावत हे अउ आन जिला बर घलो एक बढ़िया उदाहरण बनत हे।