सफलता के कहानी :बिना केमिकल, बंपर मुनाफा: डोलनारायण के जैविक मिरचा ह बजार मं मचाइस धूम
रायपुर. जैविक खेती ह माटी के सेहत ला सुधारे के संग, कम खरचा मं जहर-मुकुत (रसायन-मुक्त) अउ पौष्टिक फसल उगाय के ताकत देथे। खेती-किसानी के ए टिकाऊ तरीका ह केंचुआ खाद अउ प्राकृतिक तरीका ले कीड़ा-मउंहा ला रोक के न केवल पर्यावरण ला बचाथे, बल्कि खेती के खरचा ला कम करके अउ बजार मं बढ़िया दाम देवा के किसान मन के आय ला घलो बढ़ाथे। जैविक खेती के माध्यम ले डोलनारायण जइसन किसान अपन मेहनत, नवा तकनीक अउ प्राकृतिक तरीका के उपयोग करके न केवल बढ़िया कमाई करत हें, बल्कि आन किसान मन बर एक मिसाल घलो बनत हें।
खेती मं अगर नवाचार अउ मेहनत के मेल होवय, त माटी ह सोना उगलना सुरू कर देथे। रायगढ़ जिला के लैलूंगा विकासखंड के एक प्रगतिशील किसान डोलनारायण पटेल ह ए बात ला सच करके देखा दे हे। ओहा पारंपरिक खेती के ढर्रा ला छोड़ के जैविक तरीका ला अपनाइस अउ आज ओहा पूरा क्षेत्र बर मिसाल बन गे हे।
थोरिक जमीन, बड़े मुनाफा
मिरचा ह बदल दीस किस्मत: डोलनारायण ह सिरिफ 75 डिसमिल जमीन मं जैविक मिरचा के खेती करिस। ओकर परिणाम ह सबो ला चकित कर दीस। सिरिफ 15 दिन के तुड़ाई मं ओहा 75,000 रुपय के मिरचा बेंच दीस। एक ही पौधा ले लगभग सवा किलो तक मिरचा मिलिस। जैविक खेती होय के सेती मिरचा के चमक अउ ओकर चरचराहट (तीखापन) ह गजब रहिस, जेखर ले बजार मं ओला 5 हजार रुपय प्रति क्विंटल के बढ़िया दाम मिलिस।
बिना यूरिया-डीएपी के जादुई पैदावार
डोलनारायण के सफलता के सबसे बड़े रहस्य हे—रासायनिक खाद मन के त्याग। ओहा यूरिया अउ डीएपी के जगह मं गोबर खाद (लगभग 3 ट्रॉली) के उपयोग करिस। कृषि विभाग के सलाह मं स्प्रिंकलर अउ सिंचाई के आधुनिक साधन के प्रयोग करके खेती के खरचा ला कम करिस।
आधुनिक साधन ले सशक्त खेती के माध्यम ले डोलनारायण ह सिरिफ किसानी नइ करत हे, बल्कि ओला एक बियापारी के नजर ले देखत हे। ओकर तीर कुल 17 एकड़ (6 एकड़ खुद के अउ 11 एकड़ लीज मं) खेती के जमीन हे। ट्रैक्टर अउ हार्वेस्टर जइसन साधन ह ओला न केवल आत्मनिर्भर बनाइन हें, बल्कि कमाई के आन जरिया घलो दे हें।