“घर के बाड़ी ले संवरही मनखे मन के भविष्य”: जड़ी-बूटी के खेती ले मिलही पक्का रोजगार
धमतरी ले पायलट प्रोजेक्ट के सुरुवात; सिंदूरी अउ सतावर लगाय ले हर बछर होही 30 हजार तक के जादा कमाई
रायपुर: जड़ी-बूटी (औषधीय पौधा) के खेती अब किसान बर कमाई के एक बढ़िया रस्ता बनके आगू आवत हे। अश्वगंधा, तुलसी, आंवला, सिंदूरी, सतावर अउ एलोवेरा जइसन पौधा के मांग बाढ़े ले अब गांव-गंवई मा तरक्की के नवा दुआर खुलत हे।
छत्तीसगढ़ के गांव मा रहने वाला नोनी-बऊ ला अपन गोड़ मा खड़ा करे बर ‘छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड’ ह एक बड़े कदम उठाए हवय। बोर्ड के नवा योजना “घर के बाड़ी मा औषधीय पौधा के रोपण” के जरिए अब महिला मन घर बैठे कमाई कर सकहीं। ए योजना के असल मकसद महिला मन ला घर के आंगन (बाड़ी) मा ही रोजगार देना आय।
सिंदूरी अउ सतावर के मांग सिंदूरी अउ सतावर के खेती मा अभी भारी मुनाफा हे, काबर कि आयुर्वेद अउ प्राकृतिक रंग बनाए मा एकर भारी उपयोग होथे। योजना के तहत महिला मन ला सिंदूरी अउ सतावर के पौधा मुफत मा दे जात हे।
- सिंदूरी: एकर बीज के उपयोग खाना, सुग्घर दिखे के सामान (Cosmetics) अउ दवाई बनाए मा होथे।
- सतावर: एहा कमजोरी दूर करे अउ मानसिक तनाव कम करे के दवाई मा काम आथे।
कम बखत मा पक्का कमाई ए योजना के सबले बड़े खूबी ए हे कि सिंदूरी ले 12 महीना अउ सतावर ले 16 महीना मा पैदावारी सुरु हो जाथे। हर महिला ला हर बछर 20 हजार ले 30 हजार रुपिया तक के अतिरिक्त आय होही। एक बार पौधा लगाय के बाद, एहा आने वाला 20 बछर तक कमाई के जरिया बने रहिही।
धमतरी मा पायलट प्रोजेक्ट के सफलता ए योजना के सुरुवात धमतरी जिला ले ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप मा करे गे हवय। जिला के 27 गांव के 509 महिला मन अपन बाड़ी मा लगभग 82 हजार सतावर अउ 39 हजार सिंदूरी के पौधा लगाइन हें। उम्मीद हे कि जनवरी 2027 ले ए मन ला पहली फसल ले कमाई होय बर धरही।
बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ह ए योजना ला गांव के मजबूती बर एक मिसाल बताइन हें। वहीं उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ह कहीन कि गांव के महिला मन घर के जिम्मेदारी के सेती बाहर काम करे बर नई जा पाइन, ए योजना ओमन ला घर के दुआर मा ही सम्मान के साथ रोजगार अउ पैसा कमाय के मौका देही।