बिसेस लेख : बदलत इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़त भारत: रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलही तरक्की के दुआर
“गति शक्ति अउ आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ के अर्थव्यवस्था ला मिलही नई उड़ान”
रायपुर, भारत आज अब्बड़ तेज रफ़्तार से आधुनिक बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) अउ मजबूत आर्थिक नेटवर्क बनाय के कोति आघू बढ़त हे। सड़क, रेल, बंदरगाह अउ लॉजिस्टिक्स ला एक संगे जोड़त हुए देस ला आर्थिक रूप से अउ जादा काबिल अउ आत्मनिर्भर बनाय के कोसिम लगातार जारी हे। बिकास के ए दूरदरसी सोच के एक अब्बड़ सुघर उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर ए। ए कॉरिडोर सिरिफ़ दो सहर मन ला जोड़े अइय्या सड़क योजना नो हे, भलुक ए “नवा भारत के नई रफ़्तार” के चीन्हा ए, जो उद्योग, ब्यापार, निवेश अउ रोजगार के नवा अकास खोले बर जावत हे।
मझिया-पूरबी समुंदर तीर ला जोड़े अइय्या महामारग
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देस के मझिया भाग ला पूरबी समुंदर तीर से जोड़े अइय्या एक अब्बड़ जरूरी आर्थिक रसता ए। एहा छत्तीसगढ़, ओडिशा अउ आंध्र प्रदेश के बीच बिना कोनो रुकावट के संपर्क (कनेक्टिविटी) बनाही, जेकर से सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क अउ औद्योगिक काम-बूता मन ला नई गति मिलही। ए योजना ला प्रधानमंत्री के “गति शक्ति” अउ “आत्मनिर्भर भारत” के सोच ला धरती मां उतारे के कोति एक बड़े कदम माने जात हे।
बिकास के मूलमंतर
कोनो घलो राज चाहे देस के बिकास के सबले मजबूत अधार ओकर इंफ्रास्ट्रक्चर होते। जहां दुनिया के सतर के सड़क मन, सुघर परिवहन अउ अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुबिधा मन होते, उहां उद्योग मन के तेजी से फैलाव होते अउ निवेश खंचे चले आथे। ए कॉरिडोर माल परिवहन ला अउ जादा तेज, सुरछित अउ कम खर्चीला (लागत प्रभावी) बनाही। एकर नतीजा ए होही कि उद्योग मन ला कचा माल सहलियत से मिलही अउ तइयार माल ह कम से कम समय मां बजार तक पहुंच सकही।
चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देस के बड़े समुंदरी दुआर मन मां ले एक ए, एकर बर ए कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ ला सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलही। एकर सबले बड़े फायदा ए होही कि राज के उद्योग मन के देस अउ बिदेस के बजार मन तक सीधी पहुंच बनही, जेकर से निरयात (एक्सपोर्ट) ला बढ़ावा मिलही अउ स्थानीय माल मन ला दुनिया भर मां पहिचान मिलही।
छत्तीसगढ़ ला मिले अइय्या बड़े फायदा
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के अर्थव्यवस्था बर गेम-चेंजर साबित होय वाला हे। छत्तीसगढ़ ह खनिज संपदा, बिजली संसाधन, खेती-किसानी अउ वनोपज से भरापूरा राज ए। इहां लोहा, कोयला, बॉक्साइट अउ स्टील उद्योग के अब्बड़ संभवाना हे। पहिली सुघर परिवहन अउ लॉजिस्टिक नेटवर्क के कमी के कारन उद्योग मन अपन पूरा ताकत के फायदा नहीं उठा पावत रहिन, पर ए कॉरिडोर ए जम्मो चुनौती मन ला जड़ से खतम कर दिही।
औद्योगिक बिकास ला बढ़ावा
कॉरिडोर के बने से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर अउ जगदलपुर जइसन इलाका मन मां नवा औद्योगिक क्लस्टर्स तैयार होहीं। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, फूड प्रोसेसिंग अउ छोटे उद्योग (एमएसएमई) मन ला एक नई उर्जा मिलही, जेकर से देस अउ बिदेस के निवेशक मन के धियान ए कोति तेजी से बढ़ही।
रोजगार के नवा मउका मन के जनम
एतके बड़े बुनियादी ढांचा योजना के अइय्या ले रोजगार के मउका घलो ओतके उबर के आथे। सड़क निरमान, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नवा औद्योगिक इकाई मन अउ परिवहन सेवा मन के माध्यम से हजारों मनखे मन ला सीधे अउ परोछ रूप से रोजगार मिलही। स्थानीय युवा मन ला अपन ही इलाका मां कमाय-खाय के साधन मिले से पलायन के समिस्या मां अब्बड़ रोक लगही।
बस्तर इलाका के कायाकल्प
ए कॉरिडोर बस्तर संभाग बर बिसेस रूप से बदलाव लाय वाला साबित होही। कतको दिन ले बिकास के मुख्यधारा से कटे इलाका मन मां सुघर सड़क अउ ब्यापारिक संपर्क बनही। बस्तर के कीमती वन उपज, अनूठे हस्तशिल्प, खेती के उपज अउ छोटे उद्योग मन ला बड़े बजार तक पहुंच मिलही, जेकर से आदिवासी समाज के आय (कमई) मां बढ़ाबा होही अउ इलाका के अर्थव्यवस्था मजबूत होही।
खेती अउ वनोपज के सही मोल
छत्तीसगढ़ देस मां धान के कटोरा के रूप मां परसिद्ध हे। एकर अलावा इहां मक्का, दलहन, फल अउ छोटे वनोपज के घलो भारी मात्रा मां उत्पादन होते। सुघर परिवहन बियवस्था से किसान मन अउ वनोपज बटोरे अइय्या मन ला अपन उपज ला मंडी मन तक पहुंचाय मां सहलियत होही। परिवहन के खरच घटे से सीधे तौर पर किसान मन के मुनाफ़ा बढ़ही।
पर्यटन उद्योग ला नवा उड़ान
चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर अउ बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन ठउर मन तक पहुंच सुगम होय से राज मां पर्यटन उद्योग ला भारी बढ़ावा मिलही। एकर से होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन अउ हस्तशिल्प के ब्यापारी मन के कमई दुगुनी होही।
ब्यापार अउ निरयात मां ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी
विशाखापट्टनम पोर्ट तक सहलियत अउ तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योग मन के दुनिया भर मां मुकाबला करे के ताकत (प्रतिस्पर्धात्मकता) बढ़ही। संछेप मां कहिन तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर सिरिफ़ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नो हे, भलुक छत्तीसगढ़ के प्रगति, संमृद्धि अउ आत्मनिर्भरता के नवा महामारग ए। एहा छत्तीसगढ़ ला देस के एक बड़े औद्योगिक अउ ब्यापारिक हब के रूप मां खड़ा करे के सामरथ राखथे।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही ताकतवर अर्थव्यवस्था के नेव (नींव) होते, अउ येही योजना आघू अइय्या समय मां छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे देस ला बिकास के नवा ऊँचाई मां ले जाही। नवा भारत के नई रफ़्तार के ए कॉरिडोर देस के हर कोना ला प्रगति के साझ मुख्यधारा से जोड़े के एक जीवंत माध्यम ए।
मुख्यमंत्री के विजन: छत्तीसगढ़ के समृद्धि के महामारग
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह कहिन कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर हमर छत्तीसगढ़ के आर्थिक रीढ़ के हड्ढी बने बर जावत हे। हमर राज ह खनिज संपदा, खेती-किसानी अउ समृद्ध वनोपज से भरे हे, सांतुन दुनिया के बजार मन तक सोझ अउ तेज पहुंच नहीं होय के कारन हमर उधमी मन अउ किसान मन ला अपन छमता के पूरा फायदा नहीं मिल पावत रहिस। ए कॉरिडोर हमर ए भौगोलिक चुनौती ला मउका मां बदल दिही। विशाखापट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़े के बाद छत्तीसगढ़ के स्टील, हस्तशिल्प अउ खेती के उपज सीधे अंतर्राष्ट्रीय बजार मन मां अपन धाक जमाहीं। हमर सरकार के संकलप हे कि ए मारग के कचार मां अत्याधुनिक औद्योगिक क्लस्टर अउ लॉजिस्टिक पार्क बनाय जायं, ताकि स्थानीय युवा मन ला बड़े पैमाना मां रोजगार मिले अउ बस्तर के साथ-साथ पूरे राज मां खुशहाली के एक नवा दउर सुरु होवय।