धमतरी में ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ का बना नया रिकॉर्ड
- खरीफ 2026 में 80 हजार से अधिक किसानों ने कराया बीमा
- बीते 5 सालों में सबसे बड़ा आंकड़ा
धमतरी , बदलते मौसम, अनिश्चित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से फसलों को सुरक्षित करने के लिए संचालित ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) धमतरी जिले के किसानों के लिए एक अभेद्य आर्थिक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। खरीफ वर्ष 2026 में जिले के 80 हजार 920 किसानों ने 84,277.75 हेक्टेयर कृषि रकबे का बीमा कराकर नया इतिहास रच दिया है। यह आंकड़ा बीते पांच वर्षों में बीमित किसानों और रकबे की अब तक की सर्वोच्च रिकॉर्ड संख्या है।
पिछले वर्षों की तुलना में भारी उछाल
खरीफ वर्ष 2025 की तुलना में इस बार बीमा कराने वाले किसानों और बीमित रकबे दोनों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है:
- किसान सहभागिता: खरीफ 2025 में 71,572 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया था, जिसकी तुलना में इस वर्ष 9,348 अधिक किसान योजना से जुड़े हैं।
- बीमित रकबा: बीते वर्ष 75,977.28 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा हुआ था, जिसमें इस वर्ष 8,300 हेक्टेयर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
बीते 5 वर्षों में किसान सहभागिता के आंकड़े:
- वर्ष 2022: 68,425 किसान
- वर्ष 2023: 73,264 किसान
- वर्ष 2024: 72,081 किसान
- वर्ष 2025: 71,572 किसान
- वर्ष 2026: 80,920 किसान (सर्वोच्च रिकॉर्ड)
प्रशासनिक पहल और जमीनी जागरूकता अभियान का असर
जिले में रिकॉर्ड पंजीयन के पीछे जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ठोस रणनीति और जन-जागरूकता अभियानों की मुख्य भूमिका रही है:
- विशेष शिविरों का आयोजन: कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित कर किसानों को पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अंतिम तिथि की पारदर्शी जानकारी दी गई।
- सुगम पंजीयन व्यवस्था: किसानों की सहूलियत के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (ADCC) की शाखाओं के माध्यम से पंजीयन की सरल व्यवस्था की गई, जिससे किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़े।
सशक्त किसान और सुरक्षित कृषि की दिशा में मजबूत कदम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अतिवृष्टि, सूखा या कीट प्रकोप जैसी अनिश्चितताओं के समय किसानों को वित्तीय राहत प्रदान करती है। धमतरी जिले में बीमित रकबे और किसानों की संख्या में आई यह ऐतिहासिक तेजी यह साबित करती है कि किसान अब संभावित जोखिमों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।