सुकमा में सूरज की रोशनी से आसान हो रही जिंदगी, गांवों में हाईमास्ट तो खेतों में पहुंचे सोलर पंप
जहां बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच चुनौती रही है, वहां सुकमा के दूरस्थ गांवों में सौर ऊर्जा कई जरूरतों का सहारा बन रही है। गांवों की गलियों और चौक-चौराहों पर सोलर हाईमास्ट से रोशनी पहुंच रही है, सोलर पंपों से पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए भी सौर ऊर्जा का विकल्प मिल रहा है।
जिले में अब तक 71 सोलर हाईमास्ट लगाए जा चुके हैं। नियद नेल्लानार योजना के तहत सिलगेर, पूवर्ती, टेकलगुडियम, सालातोंग, मोरपल्ली, बेदरे और तोकनपल्ली समेत कई गांवों में इनकी स्थापना हुई है। 8 और हाईमास्ट लगाने का काम चल रहा है। रात में इनकी रोशनी से ग्रामीणों के आवागमन और सार्वजनिक गतिविधियों को सुविधा मिल रही है।
इन सुविधाओं के साथ उनके रखरखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सुशासन तिहार में ग्रामीणों से मिली शिकायतों के बाद खराब हाईमास्ट की एलईडी लाइट और बैटरियां बदली गईं। इससे कई स्थानों पर बंद पड़ी रोशनी फिर शुरू हो सकी।
पेयजल व्यवस्था में भी सोलर पंप अहम भूमिका निभा रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत सुकमा के गांवों में 672 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं। खासकर दूरस्थ इलाकों में सौर ऊर्जा से चलने वाले इन पंपों ने पानी की उपलब्धता को आसान बनाने में मदद की है। ग्रामीण परिवारों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हुई है।
किसानों के लिए सौर ऊर्जा का फायदा खेतों तक पहुंच रहा है। सौर सुजला योजना के तहत जिले में पिछले आठ वर्षों में 4,300 सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 200 पंपों का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया गया। सोलर पंप किसानों को उपलब्ध जलस्रोतों से खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, जिससे सिंचाई की सुविधा बढ़ी है।
सुकमा में सौर ऊर्जा का विस्तार स्ट्रीट लाइट तक भी हो रहा है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है, जबकि पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का काम भी जारी है।
सुकमा में सौर ऊर्जा से जुड़ी ये पहलें दिखाती हैं कि दूरस्थ इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल सीधे लोगों की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। एक तरफ गांवों में रात का अंधेरा कम हो रहा है, तो दूसरी तरफ पेयजल और सिंचाई जैसी सुविधाओं के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ रहा है।