25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षा परियोजनाकर्मियों ने उठाई आवाज: CM हेमंत सोरेन से 7वें वेतनमान, अनुकंपा नियुक्ति और 60 साल तक सेवा सुरक्षा की मांग
- 1998 के चतुर्थ वेतनमान ढांचे में काम करने को मजबूर हैं कर्मी; जिला और प्रखंड कर्मियों ने मुख्यमंत्री को सौंपा सामूहिक ज्ञापन
- स्वास्थ्य एवं समूह बीमा, पदोन्नति, ग्रेच्युटी और पारदर्शी सेवा नियमावली लागू करने की जोरदार वकालत
गुमला/रांची। झारखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के जिला एवं प्रखंड स्तरीय कर्मियों ने अपने मानदेय और सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 15 से 25 वर्षों से सरकारी शैक्षिक योजनाओं के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में जुटे कर्मियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर सातवें वेतनमान के अनुरूप वेतन निर्धारण, सेवा सुरक्षा और सामाजिक लाभ देने की मांग की है। कर्मियों का कहना है कि दशकों से पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद वे आज भी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
1998 के ढांचे से मुक्ति और 7वें वेतनमान की दरकार
ज्ञापन के अनुसार, परियोजनाकर्मियों का वर्तमान वेतन ढांचा वर्ष 1998 में निर्धारित चतुर्थ वेतनमान संरचना पर अटका हुआ है। कमरतोड़ महंगाई और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच दशकों पुरानी व्यवस्था पर काम करना अब संभव नहीं है। कर्मियों ने मांग की है कि:
- सातवें वेतनमान के आधार पर मासिक परिलब्धियों का नए सिरे से निर्धारण किया जाए।
- नियमित वार्षिक वेतनवृद्धि और समय-समय पर परिलब्धियों के पुनरीक्षण की स्थायी व्यवस्था बने।
स्वास्थ्य बीमा, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति का सुरक्षा कवच
कर्मियों ने सेवा के दौरान सुरक्षा और अनिश्चित भविष्य को देखते हुए ठोस नीति बनाने की अपील की है:
- त्रिसतरीय बीमा: सभी कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा, समूह जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा की सुविधा मिले।
- अनुकंपा नियुक्ति: सेवाकाल के दौरान किसी भी कर्मी के असामयिक निधन पर उसके पात्र आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियोजन दिया जाए।
- करियर ग्रोथ: वर्षों से एक ही पद पर अटके कर्मियों के लिए आंतरिक प्रोन्नति (Promotion) और सेवा अवधि के आधार पर समयबद्ध वित्तीय उन्नयन (वित्तीय लाभ) की व्यवस्था हो।
60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा और सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी
कर्मियों ने मांग की है कि उनकी नौकरी को 60 वर्ष की आयु तक सुरक्षित किया जाए। इसके साथ ही:
- सभी कर्मियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) का विधिवत संधारण हो।
- सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश (Earned Leave) का नकदीकरण और आर्थिक सहायता दी जाए।
- समान पद पर कार्यरत कर्मियों के बीच मौजूद वेतन विसंगतियों को तत्काल दूर कर एक पारदर्शी सेवा नियमावली लागू की जाए।
परियोजनाकर्मियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संवेदनशीलता दिखाते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को इन सभी मांगों पर तत्काल समीक्षा कर समयबद्ध आदेश जारी करने का आग्रह किया है।