हथियार छोड़ थामा एक-दूसरे का हाथ: हजारीबाग ओपन जेल में 2 पूर्व नक्सलियों ने लिए सात फेरे, पुलिस-प्रशासन बना बाराती
- सुरेश मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रम ने परिणय सूत्र में बंधकर शुरू की नई जिंदगी; डीजीपी के निर्देश पर हुआ विवाह पंजीकरण
- नक्सलवाद त्याग मुख्यधारा में लौटे कैदियों के पुनर्वास की मानवीय मिसाल, शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
हजारीबाग। बंदूक का खौफनाक साया छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने हजारीबाग ओपन जेल के भीतर सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन की शुरुआत की है। इस अनूठी शादी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ही आगे बढ़कर ‘बाराती और घराती’ की रस्में निभाईं और दोनों का विवाह संपन्न कराया।
सरेंडर के बाद ओपन जेल में पनपा रिश्ता
रांची के बुंडू (बारूहातू गांव) निवासी सुरेश सिंह मुंडा और तमाड़ (अराहंगा गांव) की रहने वाली सोमवारी हेम्ब्रम कभी नक्सली संगठन में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण नीति के तहत हथियार डालने के बाद दोनों को हजारीबाग ओपन जेल भेजा गया था, जहां दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया।
डीजीपी के निर्देश पर विधिवत पंजीकरण
शादी की रूपरेखा डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर तैयार की गई। हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का की मौजूदगी में कानूनी तौर पर विवाह का पंजीकरण कराया गया। इस दौरान जेल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए वर-वधू को उपहार व आशीर्वाद देकर नई शुरुआत के लिए प्रेरित किया।
मुख्यधारा और पुनर्वास का मजबूत संदेश
प्रशासन की इस मानवीय पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को न केवल सुरक्षित माहौल देना है, बल्कि उन्हें सामाजिक स्वीकार्यता और पारिवारिक स्थिरता प्रदान करना भी है। फरवरी-मार्च में संपन्न हुई इस शादी की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे झारखंड में नक्सल पुनर्वास नीति की एक अनुकरणीय और सकारात्मक मिसाल माना जा रहा है।