सुरक्षा, सम्मान अउ स्वावलंबन के बनत हे नवा पहिचान
छत्तीसगढ़ में आर्थिक अउ सामाजिक रूप ले मजबूत होत हें माई लोगन श्रमिक
डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)
रायपुर. हर बछर 1 मई के मनाए जाय वाला ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ मजदूर मन के मेहनत अउ ओकर योगदान ला सम्मान देवे के एक बड़े मौका होथे। छत्तीसगढ़ में ए दिन एखरे बर घलो खास हे, काबर कि इहां के अर्थव्यवस्था में माई लोगन (महिला) श्रमिक मन के भागीदारी लगातार बढ़त हे अउ ओकर योगदान पहिली ले जादा परभावी होत जावत हे।
राज्य के गांव-देहात (ग्रामीण अंचल) में माई लोगन मन कतको बखत ले खेती-किसानी, वनोपज बटोरना, तेंदूपत्ता तोरना अउ हस्तशिल्प (हाथ ले बने समान) जइसन काम में लगे हें, ओसने सहर में घलो घर बनाय के काम, घरेलू सेवा अउ छोटे-मोटे व्यापार में ओकर मौजूदगी तेजी ले बढ़े हे। ए बदलाव सिरिफ रोजगार तक नई हे, बल्कि एखर ले माई लोगन मन के सामाजिक पहिचान अउ आत्मनिर्भरता ला घलो नवा मजबूती मिलत हे।
एकर बाद घलो ए बात सच हे कि असंगठित क्षेत्र में काम करे वाली माई लोगन मजदूर ला कतको बखत तक सही पगार (वेतन), सुरक्षित काम के जगह अउ सामाजिक सुरक्षा जइसन बुनियादी सुविधा ले दूर रहना पड़िस। मजदूरी में भेदभाव, स्वास्थ्य सुविधा के कमी, लइका होए के बखत छुट्टी के कमी अउ पुरानी सोच जइसन अड़चन ओकर आगू हमेशा खड़े रहीन।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अगुवाई में राज्य सरकार ह ए चुनौती ला धियान में रखत हुए माई लोगन (महिला) श्रमिक मन के मजबूती ला पहिली प्राथमिकता दीस हे। नवा श्रमिक नीति के माध्यम ले असंगठित क्षेत्र के महिला मन बर कम ले कम मजदूरी पक्का करे अउ काम के जगह में सुरक्षा के नियम ला लागू करे बर कड़ा कदम उठाए गे हे। ‘महिला शक्ति केंद्र’ ला सिरिफ मदद केंद्र नई, बल्कि सलाह, कानूनी सहयोग अउ रोजगार के रद्दा देखाए के एक बड़े माध्यम के रूप में तैयार करे गे हे। उहें ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ के जरिए हिंसा के शिकार महिला मन ला तुरत मदद अउ फिर ले बसे के सुविधा मिलत हे।
राज्य में चलत अलग-अलग योजना माई लोगन मजदूर मन के जिनगी में सुरक्षा अउ आत्मनिर्भरता के मजबूत अधार तैयार करत हें। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीयन कराए निर्माण महिला श्रमिक ला लइका होए के बाद 20 हजार रूपिया के मदद दिए जात हे, जेकर ले ओकर आर्थिक बोझ कम होथे। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना माई लोगन ला खुद के काम (स्वरोजगार) शुरू करे बर उत्साहित करत हे, अउ निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना काम के जगह में ओकर सुरक्षा ला पक्का करथे।
महतारी वंदन योजना के तहत माई लोगन ला हर महीना 1000 रूपिया के आर्थिक मदद दिए जात हे, जेकर ले ओकर आर्थिक हालत सुधरत हे। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 ले 50 बछर के उमर वाली पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिक ला (जेकर कम ले कम तीन बछर के पंजीयन हे) एक लाख रूपिया तक के मदद दे के ओमन ला खुद के रोजगार ले जोड़े जात हे।
एकर साथ ही ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के माध्यम ले ‘स्वयं सहायता समूह’ (SHG) ला बढ़ावा दिए जात हे, जेकर ले माई लोगन ला कमाई के साधन मिले के साथ-साथ अगुवाई करे के ताकत घलो मिलत हे। राज्य सरकार के ‘कौशल विकास कार्यक्रम’ ह महिला मजदूर ला ट्रेनिंग दे के काम-धंधा ले जोड़त हे। घर में काम करे वइया, ठेका मजदूर अउ हमाल परिवार मन बर घलो विशेष योजना चलाए जात हे, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, तियागे हुए (परित्यक्ता) अउ तलाकशुदा महिला ला आत्मनिर्भर बने के मौका दिए जात हे।
आज छत्तीसगढ़ में माई लोगन (महिला) श्रमिक मन सिरिफ श्रमशक्ति नई रहि गे हें, बल्कि विकास के सक्रिय भागीदार बन चुके हें। ओकर भूमिका अब सिरिफ मदद करे तक सीमित नई हे, बल्कि निर्णय लेवे के स्तर तक पहुंचत हे। योजना के बढ़त पहुंच अउ जागरूकता के कारण ओकर भीतर आत्मविश्वास बढ़े हे, जेकर ले समाज में ओकर सम्मान घलो लगातार बढ़त जावत हे।
छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक बर करे जात प्रयास ले ए बात साफ हो जाथे कि संवेदनशील नीति अउ बढ़िया ढंग ले ओला लागू करे ले सुखद बदलाव संभव हे। सुरक्षा, सम्मान अउ रोजगार के मौका के साथ माई लोगन मजदूर आज राज्य के विकास के मजबूत नींव बनत हें। ए बदलाव सिरिफ आर्थिक नई हे, बल्कि सामाजिक चेतना अउ मजबूती (सशक्तिकरण) के घलो प्रतीक बनके आगू आवत हे।