बदलता छत्तीसगढ़: वनोपज के चमक ले संवरत ग्रामीण अर्थव्यवस्था
हरा सोना, नवा उड़ान: वनोपज ले आत्मनिर्भरता कोती छत्तीसगढ़
धनंजय राठौर संयुक्त संचालक
अशोक कुमार चंद्रवंशी सहायक जनसंपर्क अधिकारी
छत्तीसगढ़, जेला ‘हर्बल स्टेट’ के रूप म जाने जाथे, आज अपन संपन्न वन संपदा अउ दूरगामी सरकारी नीति के दम म गांव के अर्थव्यवस्था ला एक नवा रस्ता दिखावत हे। इहाँ के जंगल ले मिलइया ‘ग्रीन गोल्ड’ (हरा सोना) अब सिर्फ स्थानीय उपयोग तक सीमित नइ हे, बल्कि दुनिया भर के बजार म अपन चमक बिखेरत हे। छत्तीसगढ़ के ये पहल न केवल जंगल के बचाव करत हे, बल्कि ग्रामीण समाज म स्वावलंबन, भरोसा अउ आर्थिक सुरक्षा के एक नवा चेतना जगावत हे।
‘ग्रीन गोल्ड’ (हरा सोना) जंगल के असली पूंजी छत्तीसगढ़ म वनोपज ला ‘हरा सोना’ कहे जाथे, जेकर से राज्य के आर्थिक रीढ़ मजबूत होथे। तेंदूपत्ता अउ बांस ला ओकर बहुमुखी उपयोग के सेती खास तौर म ‘हरा सोना’ माने जाथे। लाख, शहद अउ दुर्लभ जड़ी-बूटी के संग-संग सागौन, साल, बीजा अउ शीशम जइसन कीमती रुख-राई इहाँ भारी मात्रा म हें। आधुनिक प्रसंस्करण (processing) के माध्यम ले ये कच्चा माल ला ऊंच मोल के सामान म बदले जावत हे।
जामगांव एम केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अउ वन मंत्री केदार कश्यप कोति ले सुरू करे गे ये इकाई, वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था के पावरहाउस आय। आंवला, बेल, गिलोय अउ अश्वगंधा जइसन चीज ला जूस, कैंडी अउ हर्बल पाउडर म बदले जाथे। वैज्ञानिक भंडारण: इहाँ 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला आधुनिक गोदाम हें, जेहा फसल ला सुरक्षित रखथे अउ संग्राहक ला बाजार के उतार-चढ़ाव ले बचाथे।
छत्तीसगढ़ हर्बल्स: स्थानीय ले वैश्विक तक राज्य सरकार के ये आधिकारिक ब्रांड अब सुधता अउ प्राकृतिक उत्पाद के दूसर नाम बन गे हे।
- संजीवनी स्टोर: इकर संख्या 30 ले बढ़ के अब 1,500 ले जादा हो गे हे।
- ई-कॉमर्स: अब ये सब सामान अमेज़न अउ फ्लिपकार्ट जइसन प्लेटफॉर्म म घलो मिलत हे।
- खास सामान: भृंगराज तेल, नीम तेल, च्यवनप्राश, सुध शहद, महुआ के सामान, बेल शर्बत अउ कतको किसम के आयुर्वेदिक चूर्ण।
महिला सशक्तिकरण: अर्थव्यवस्था के रीढ़ ये पूरा व्यवस्था के बीच म महिला स्व-सहायता समूह हें। दूर-दराज अउ आदिवासी इलाका के मनखे मन, खास करके महिला मन मशीन चलाना, क्वालिटी चेक करना अउ पैकेजिंग के काम संभालत हें। एकर से गांव ले पलायन कम होय हे अउ परिवार के आय म बाढ़ होय हे। ये मॉडल आदिवासी महिला मन ला आर्थिक रूप ले ‘सशक्त’ बनाय के एक सफल उदाहरण आय।
हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट (2025) भविष्य ला देखत हुए बछर 2025 म बने ये यूनिट ह छत्तीसगढ़ ला ‘हर्बल मैन्युफैक्चरिंग हब’ के रूप म खड़ा कर दे हे। इहाँ जड़ी-बूटी मन ले ऊंच क्वालिटी के अर्क (extract) तइयार करे जाथे, जेकर भारी मांग अंतरराष्ट्रीय दवा अउ वेलनेस इंडस्ट्री म हे। अब हमर राज्य सिर्फ कच्चा माल देवइया क्षेत्र नइ राह गे हे, बल्कि बने-बनाय बढ़िया सामान के निर्माता बन गे हे।