शिक्षा विभाग की 2 साल की उपलब्धियां, मंत्री गजेंद्र यादव ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड
रायपुर, छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के विगत 2 वर्षों के कार्यों का लेखा-जोखा जारी किया गया। नवा रायपुर अटल नगर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने विभागीय उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- युक्तियुक्तकरण से शिक्षक संतुलन: 10,538 शालाओं का समायोजन; 453 शिक्षकविहीन और 4,729 एकल-शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती।
- बंपर भर्ती व पदोन्नति: 2 वर्षों में 7,000 से अधिक पदोन्नतियां; 5,000 शिक्षक पदों पर सीधी भर्ती और 3,000 संविदा पदों पर प्रक्रिया जारी।
- भर्ती में CBT व्यवस्था: पारदर्शी और त्वरित चयन के लिए ऑनलाइन ‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट’ (CBT) लागू।
- लैंग्वेज मैपिंग में देश में अव्वल: मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए लैंग्वेज मैपिंग करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना।
- डिजिटल मॉनिटरिंग & AI: एआई आधारित ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ स्थापित; बारकोड ट्रैकिंग से पाठ्यपुस्तक वितरण में ₹40 करोड़ की बचत।
- बजट 2026-27 का प्रावधान: 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए ₹100 करोड़ और 700 भवनविहीन स्कूलों के लिए नया बजट प्रावधान।
शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण, पारदर्शी भर्ती और पदोन्नति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और RTE के तहत राज्य में 10,538 विद्यालयों का समायोजन कर 15,165 शिक्षकों/प्राचार्यों को संतुलित रूप से पदस्थ किया गया है।
- भर्ती प्रक्रिया: बीते 2 वर्षों में 2,104 पदों पर सीधी भर्ती पूरी हुई। स्वामी आत्मानंद एवं विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में संविदा भर्ती के लिए CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) प्रणाली शुरू की गई है, जिसके जरिए वर्तमान में 3,066 पदों पर त्वरित चयन प्रक्रिया चल रही है। स्पेशल एजुकेटर के 848 पद मंजूर किए गए हैं।
- पदोन्नति: 2,813 प्राचार्यों (टी व ई संवर्ग) तथा 1,798 व्याख्याताओं सहित कुल 7,000 से अधिक शिक्षकों को पदोन्नत किया गया।
मातृभाषा में शिक्षा और ‘लैंग्वेज मैपिंग’
छत्तीसगढ़ भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
- स्थानीय बोलियां: बस्तर व सरगुजा के 5,000 से अधिक शिक्षकों को बहुभाषी शिक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है। कक्षा 1 से 3 के लिए छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी बोलियों में पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं।
- NEP-2020 का क्रियान्वयन: 15 जुलाई 2024 से लागू एनईपी के तहत 16 स्थानीय और 4 अंतरराज्यीय बोलियों में पठन-पाठन सामग्री तैयार की गई है।
एआई आधारित मॉनिटरिंग और प्रशासनिक डिजिटलीकरण
- टीके ऐप व बायोमेट्रिक: स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु बायोमेट्रिक और TK App लागू किया गया है, जिससे रोजाना औसतन 85% ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है।
- विद्या समीक्षा केंद्र: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित केंद्र के जरिए पीएम पोषण, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपस्थिति की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो रही है।
- ₹40 करोड़ की बचत: बारकोड आधारित पुस्तक ट्रैकिंग से फर्जीवाड़े पर लगाम लगी और राज्य को ₹40 करोड़ की सीधी बचत हुई।
बस्तर और जनजातीय अंचलों में शिक्षा क्रांति
- नियत नेल्ला नार योजना: बस्तर संभाग के 6 सीमावर्ती जिलों के 97% गांवों में प्राथमिक शालाएं स्थापित कर दी गई हैं। 48 बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया तथा 36 नए स्कूल खोले गए। 573 शिक्षा दूतों की तैनाती की गई है।
- PVTG व जनमन आवास: 156 आवासीय विद्यालयों में 33,000 से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के लिए 13 जिलों में 40 नए छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं।
अधोसंरचना विस्तार, नि:शुल्क योजनाएं और बोर्ड परिणाम
- बोर्ड रिजल्ट में सुधार: शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं व 12वीं के परीक्षा परिणामों में 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- छात्रों को सीधा लाभ: 45.33 लाख विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, 28.63 लाख बच्चों को नि:शुल्क गणवेश और 1.62 लाख छात्राओं को ‘सरस्वती साइकिल योजना’ के तहत साइकिल वितरित की गई।
- शनिवार ‘बैग-लेस डे’: प्रत्येक शनिवार को तनावमुक्त माहौल में खेल-कूद, योग, स्थानीय कला, संगीत और लोककथाओं के लिए समर्पित किया गया है।
- स्कूली इंफ्रास्ट्रक्चर: 3 वर्षों में 504 नए स्कूल और 2,583 अतिरिक्त कमरे स्वीकृत किए गए। शौचालयों के निर्माण व मरम्मत हेतु ₹52.39 करोड़ जारी किए गए।